भारतीय प्रदूशण का दुनिया में खौफ

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भले ही सेना से नहीं डर रहे पाक आतंकी! मगर दिल्ली के प्रदूशण से दुनिया डर गई! आखिर क्यों चिड़चिड़े हो गए स्वतंत्र कुमार? क्योंकि देष का दम फूलने लगा। प्रदूशण ने जहाँ उच्चत्तम न्यायालय, राश्ट्रपति भवन, संसद और प्रधानमंत्री का घर घेर लिया, वहीं हुक्मरान हों या अफसरषाही आदत से बाज अब भी नहीं आ रहे। एन.जी.टी. आदेष की नाकदर हो या बार-बार रोक लगाये जाने की अड़ंगेबाजी, मगर हकीकत यह कि प्रदूशण का रूप किसी काल और अपातकाल से कम नहीं है। आसान है परिवर्तन पुरूश की भावना दरकिनार करना, एनजीटी के फैसले फाइलों में ही दबाना उससे भी आसान है, मगर सच्चाई का एक रूप यह कि प्रदूशण का डंक किसी बड़ी विध्वंसक स्थिति से कम नहीं है, यह दिल्ली एनसीआर की आवाम ही नहीं समझ गई बल्कि विदेषी मेहमान भी डर कर भागने लगे। प्रदूशण ने दिल्ली/एन.सी.आर की सांसे उखाड़ दी, बच्चों, बुजुर्गों का जीना दूभर हो गया, देष का सबसे बड़ा गन्दा नाला जहां यमुना नदी बन गई, वहीं अफसरषाही है कि लकीर की फकीर से ही उबर नहीं पा रही है। वायु प्रदूशण ने भले ही राश्ट्रपति, राज्यपाल और न्यायमूर्तियों को हिला दिया! झुंझलाई एन.जी.टी. ने भी स्पश्ट कर दिया कि मासूमों की जान से खिलवाड़ करने से बाज आयें एजेन्सियाँ और सरकार! एक-दूसरे पर दोशारोपण थोपने से भी अफसर अब बच नहीं पायेंगे, आपात जैसी स्थिति हो गई, बेहतर होगा कि जमीन पर तत्काल सुधार दिखे, वरना फैसला सुना दिया जाएगा। अब आप समझ सकते हैं कि राश्ट्रीय हरित अधिकरण का विचलित होना और अफसरषाही का ‘वही ढ़ाक के तीन पात’ पर अड़े रहना। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि सरकार का उच्चत्तम न्यायालय में जाकर बार-बार यह कहना कि एन.जी.टी. के फैसले पर रोक लगाने की जरूरत है! यह सब अड़ंगा कल के लिए कितने विध्वंसक साबित हो सकते हैं इसका अन्दाजा लगाना भी बेहद मुष्किल नहीं है। फिलहाल हम आपको बता दें कि भारत की राजधानी पिछले तीन दिन से जमीन से आसमान तक पसरी काली धुंध और जहरीली हवा का सामना कर रही है, दिल्ली की तुलना दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूशणकारी षहर बीजिंग से की जा रही है मगर यह षर्मसार करने वाली बात है कि जमीनी स्तर पर धोखा और कागजों में स्याह सफेद करने की आदी भारतीय अफसरषाही अब उस चाइना की तरफ ध्यान बंटा रही है जिस चाइना में अगर सबसे ज्यादा प्रदूशण है तो उस देष में सरकार और अफसरषाही जमीनी स्तर पर पुख्ता इंतजाम करने की भी आदी है।