लाइन में लगा देश, बेइमान फिर भी भर लिए सन्दूक

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ऐसा कालाधन जमा हुआ कि मोदी शासन के गले में फंस गया। पढ़कर तो अजीब लगेगा, मगर गुमराह हो चुका देश आज भूगत रहा है। भले ही बेइमानी के खिलाफ साहसिक कदम उठाए मगर हकिकत यह कि अन्ना आन्दोलन के बाद मोदी भी बेइमानी की बह रही बैतरणी के सामने फिसल गए। 30 दिन में जमा हुये 12 लाख करोड़, पहुंच गया आरबीआई के खजाने में। मगर लाइन में लगे देषवासियों के नाम पर बांटे गये 4 लाख करोड़ से ज्यादा के नये नोट फिर भी जरूरतमंद तांकते ही रह गये।
तो क्या नोट बदलने की पहल मलेरिया साबित हुई? या बैंक अफसरों की करतुत से अनजान थे प्रधानमंत्री? नरेन्द्र मोदी की दरियादली का देश भर में जहां स्वागत हुआ वहीए हकीकत की दूसरी तस्वीर से यह दिखा कि गरीबो के साथ फिर धोखा हो गया। 40 बैंकें 125 अफसरों के रडार पर! यह सवाल चैंकाने वाला ही नहीं बल्कि उस समय कलई खोल रहा है, जब ईडी, आरबीआई देष भर में 40 से ज्यादा बैंकों की बगलें इसलिए झांक रही है क्योंकि बेईमान अफसरों ने बैंक कर्मियों के रूप में संदूक भर लिये।
क्या 500 और 1000 के पुराने नोट बदलने का चलन ही बेईमानो के लिए कामधेनु साबित हुआ? क्या देश भर में सभी बैंक अफसर भी बेईमानी में सने है? अगर नहीं तो क्या आरबीआई और देश चलाने वाली उच्च पदों पर बैठ हुक्मरान भी नादान रहे।
बहरहाल, जो भी रहा सच यह निकला कि 1.42 बैंक और 2.34000 एटीएम क्यों मुंह चिढ़ा रहे देश भर के जनता को। यही नहीं आगे समझिए आयकर अफसर बौने तो मेहनतकस व ईमानदार, ज्यादातर बैंक अफसर क्यों बदनाम हो गए।
खैर, समस्या टीम ने लखनऊ से नोएडा तक और दिल्ली से कुछ अन्य बड़े महानगर तक जनता का दर्द समझा, वहीं भू-माफिया, खनन माफिया, सरकारी ठेकेदार, बिल्ड़र, सहित अफसरशाही पर नजर गडाई स्पष्ट हुआ कि बेईमानी के सामने आयकर अफसर बौने ही नहीं साबित हुए बल्कि कुछ बैंक अफसरो की सह पर लाल और नीली बत्ती लगी लग्जरी गाडिंयो में नए और पूराने नोटों के खेल में अफसरशाही भी छेद करते खूब देखी गई।
यूं तो चालाक धनकुबेरों ने गरिबों को भी नहीं छोड़ा, ताजा मिषाल कर्नाटक में 500 करोड़ की षादी करने वाला एक सफेदपोष बड़े नौकरषाह पुलिस अफसर की सह पर 100 करोड़ की स्याह सफेद कारोबार की ओट में अपने चालक की ही जान के प्यासे बने। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 1400 बैंक खाते जो स्वयं आयकर ने बेनकाब किए- सम्भल जिले में 7000 खाते जिस तरह आईटी अफसरो में हैरान होकर पाबन्द किए उससे कहीं गुना ज्यादा चैकाने वाला सच यह आया कि बैंग्लोर में 4.7 करोड जैसी मोटी रकम नए नोट के रूप में एक ही कालेकुबेर के पास कैसे आई।
बहरहाल, युपी की आर्थिक नगरी नोएडा में 40 करोंड जैसी मोटी रकम की हेरा-फेरी के लिए बैंक के हीं दो मैनेजरों को धरा गया वहीं दिल्ली की मुण्डका शाखा में स्वयं आरबीआई ने राज खोला कि 125 करोड़ का स्याह सफेद इस बैंक से भी हो गया। हालांकि 125 अफसर देश भर में नजर गडाए है फिर भी बैंको के अधिकारी आदत से बाज नहीं आ रहे। दिल्ली के कश्मीरी गेट एरिया में एक्सिस की एक शाखा से 6 अफसरो सहित 19 लोंगो को फिर रंगे हाथो पकडा गया। बावजुद यह सिलसिला आए दिन उस समय बढ रहा है जब ईडी और आरबीआई सोटा लेकर सवार है।

खैर देश भर को नहीं मिल रही 2000 रूपये एटीएम में सूबह से शाम तक, मगर करोडों और अरबो में व्यापार करने वाले किस तरह चन्द समय में ही सन्दूक भर ले रहे है, यह सवाल मामुली नहीं है?
हालांकि, नोटबन्दी का फैसला एक साहसिक कदम साबित हुआ और तमाम राजनैतिक दलो के चुल्हे-चैके भी बन्द हुए, टिकट खरीदारी केंन्द्रो पर बर्फ पड़ गई। यहीं नहीं लुट-खसोट की रकम से टिकट खरीदारी करने वाले को जहां सदमा लगा है वहीं सरकारी जमीन कब्जेदार भवन अपार्टमेन्ट बनाने-बेचने वाले और कुछ ऐसे ठगिया जिन्होंनें जनता को भू-खण्ड बिना भवन, घर के सपने दिखाए, झांसे में लेकर इकट्ठी की गई रकम भी ज्यादातर बेकार साबित हुई मगर यह भी सच है कि मोदी सरकार से लेकर आयकर अफसर तक, आरबीआई से लेकर हजारों बैंक अफसर तक देश को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने के लिए मजबूत पहल किए, बेईमानी के सामने यह प्लान ज्यादातर छेददार ही इसलिए साबित हुआ क्योंकि 500 और 1000 के पुराने नोटो की अदला-बदली के रुप में बैंक और एटीएम डिब्बा साबित हुए, चालाक और कालेकुबेर फिर सन्दूक भर लिए।