मौजी अफसर, मौत का मकड़ जाल

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सुरसा की तरह फन फैलाए मौत के सामने जिलाधिकारी और कप्तान जैसे अफसर सिर्फ निजीहित संवारने और सरकार की जी हुजूरी तक ही सिमट कर रह गए है। पढ़ कर तो अजीब लगेगा मगर सच यही है एक तरफ एटा के अलीगंज क्षेत्र में 34 लाशे जहां उ0प्र0 सरकार की कार्यशैली पोत रही है वही जिलाधिकारी और पुलिस अधिक्षक पूरी तरह मौजी साबित हो रहे है।
15 जुलाई से शुरू हुआ मौत का आकड़ा आज 19 जुलाई तक न सिर्फ 47 मरीजों को अस्पताल में ही घेरे खड़ा है, बल्कि लौहारी क्षेत्र में 34 लोगों की जान भी निगम चुका है। यूं तो 20 मौतों के बाद सूबे के पुलिस मुखिया जवीद अहमद ने सीओ और एसओ को तत्काल निलबिंत किया, जिला आबकारी अधिकारी पर भी कार्यवाही किए जाने की बात कही। 3 अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज किए जाने के आदेश भी दिए मगर शासन में बैठा गृह विभाग उस समय भी गूंगा और बहरा साबित हो रहा है जब तीसरे ही दिन मौत का मकड़जाल फर्रूखाबाद जिले की भी पोल खोल चुका है। जहरीली शराब पीकर जहां मरने वालों की संख्या 9 हो चुकी है। साथ ही एटा जिला अस्पताल से लेकर अलीगंज क्षेत्र तक जहां मरीजों की संख्या सरकारी अस्पताल के मुताबिक 47 को भी पार कर चुकी है, 34 से ज्यादा सब क्षेत्रीय जनता को भयावह स्थिति में जकड़ चुका है, बावजूद उ0प्र0 सरकार में जिलाधिकारी अजय यादव और पुलिस कप्तान की कार्यशैली पर मुंह तक नहीं खोला। यूं तो लखनऊ और उन्नाव में भी जहरीली शराब ने बीसों परिवार उजाड़ दिए थे, 42 से ज्यादा मौतों के बाद मुख्यमंत्री को जवाब देते नहीं बना मगर अब अखिलेश शासन में जहरीली शराब कारोबार इसलिए अचरज की घड़ी नहीं बन रहा है क्योंकि विधानसभा चुनाव से पहले ही मुख्यमंत्री अखिलेश ने चुटकुलेबाजी की थी कि बुआ जी के शासन में तो शाम की दारू भी महंगी हो गई है, यूं तो उ0प्र0 राज्य का सीतापुर, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी, एटा, मैनपुरी, फर्रूखाबाद और बुलंदशहर जैसे जिले शराब कारोबारियों के लिए महफूज जगह है, मगर लखीमपुर खीरी, बदायूं, गोरखपुर मण्डल जो बरसों से चर्चित होने के बावजूद भी गृह विभाग और आबकारी महकमा अभी तक मौज में है, यह कार्यशैली न सिर्फ आबकारी आयुक्त भवनाथ सहित प्रमुख सचिव गृह विभाग तक को बेनकाब कर रही है, बल्कि अखिलेश शासन को भी 100 फीसदी उस समय कटघरे में खड़ी कर रही है, जब चंद महीने में जहरीली शराब के मकड़जाल ने मौत का आकड़ां 200 से पार कर दिया है।