अंग्रेजी माध्यम के मॉडल स्कूलों की निकली हवा

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हरदोई। प्रदेश सरकार की ओर से पब्लिक स्कूलों की भांति परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने का सपना जिले में चकनाचूर हो गया हैै। वर्तमान शिक्षा सत्र में दो परिषदीय विद्यालयोें को माडल के रूप में अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा प्रदान करने की कवायद शुरू की गई थी। जिले में नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय ऊंचा थोक व प्राथमिक हिंदी पाठशाला का चयन किया गया था। जहां पर अंग्रेजी पढ़ाने के लिए टीचरों को भेजा गया था। अंग्रेजी माध्यम की किताबें भी उपलब्ध कराई गई है। जिले में अंग्रेजी माध्यम से शुरू किए गए माडल विद्यालयों में विद्यार्थी अंग्रेजी तो दूर हिंदी की किताब पढ़ना भी नहीं सीख सके हैं। मंगलवार को शहर के दो माडल विद्यालयों की हकीकत कुछ इस प्रकार दिखाई दी।

विद्यालय में हिंदी व अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं एक साथ संचालित हो रही थी। यहां पर एक कक्षा में दो शिक्षिकाएं मौजूद थी। वहीं, एक कक्ष खाली पड़ा था। विद्यार्थियों में कुछ के पास अंग्रेजी माध्यम और कुछ के पास हिंदी माध्यम की पुस्तकें थी। मगर माडल विद्यालय में और प्राथमिक विद्यालय में कोई अंतर नहीं दिखा। बच्चे अंग्रेजी माध्यम की पुस्तक पढ़ना तो दूर उसका सही से नाम भी नहीं पढ़ सके।

प्राथमिक विद्यालय ऊंचा थोक के कक्षा चार के छात्र ने अंग्रेजी में अपना नाम तो बता दिया मगर किताबों के नाम नहीं पढ़ सके। वहीं, एक छात्रा ने अंग्रेजी कविता सुनाने का प्रयास किया मगर वह भी आधी अधूरी। इस संबंध में शिक्षक देवेंद्र सिंह ने बताया कि विद्यालय में 74 विद्यार्थियों में 44 उपस्थित हैं। हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की संख्या अलग अलग नहीं बता सके। बोले अब सभी अंग्रेजी माध्यम से ही शिक्षा ग्रहण करते हैं। हिंदी माध्यम के शिक्षक की पदोन्नति होने के कारण वह दूसरे विद्यालय चले गए हैं। विद्यालय में उनके अलावा अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा प्रदान कराने के लिए प्रधानाध्यापिका सुशील लता दीक्षित, सहायक अध्यापिका विजय श्री तैनात हैं।

प्राथमिक पाठशाला हिंदी पाठशाला
विद्यालय में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा की व्यवस्था है। मगर यहां तैनात शिक्षिकाएं कैमरा देख कर कक्षा में पढ़ाने लगीं। यहां पर बच्चे हिंदी की किताब नहीं पढ़ पा रहे थे। वह अंग्रेजी माध्यम के  पाठ्यक्रम की पुस्तकों के नाम भी नहीं बता सके। विद्यालय के बच्चे सही से अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षर तक नहीं बना पा रहे थे।

कक्षा तीन का छात्र हिंदी की कापी पर अंग्रेजी के अक्षर लिखने का प्रयास कर रहा था। मगर वह लिख नहीं सका। वहीं एक अन्य छात्र कभी कापी तो कभी बोर्ड देख रहा था। मगर कुछ भी लिख नहीं पा रहा था।
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका फरकान कौसर ने बताया कि यहां पर दोनों माध्यम से शिक्षा प्रदान की जा रही है। विद्यालय में कुल 128 बच्चे पंजीकृत हैं। हिंदी माध्यम के लिए प्रधानाध्यापिका और अंग्रेजी माध्यम के लिए प्रधानाध्यापक अखिलेश कुमार गुप्ता, शिक्षिका रश्मि द्विवेदी और नीलू सिंह तैनात हैं।

बोले जिम्मेदार
नगर शिक्षा अधिकारी पवन द्विवेदी ने कहा कि वह विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे और विद्यालय के शैक्षिक स्तर की जांच करेंगे। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. बृजेश मिश्र ने बताया कि वह विद्यालयाें का निरीक्षण करेंगे, अगर गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई की जाएगी।