वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट या लप्पूझन्ना

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वित्त मंत्रालय ने जारी किया करोड़पतियों का आंकड़ा कितना सच, कतई झूठ

वल्र्ड वेल्थ हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार भारत एशिया प्रांत का चैथा देश है जहां 35 लाख लोग बड़े अमीर होने की श्रेणी में आते हैं और जिनके पास 17.7 खरब डाॅलर की संपत्ति है, जनवरी 2016 में जारी हुए इस आंकड़े की हकीकत यह कि भारत देश में 2.36 लाख ऐसे करोड़पति लोग हैं जिनकी संपत्तियां 1 करोड़ से ऊपर की है साथ ही 35 लाख लोग ऐसे हैं जो लगभग अरबपतियों की श्रेणी में आते हैं। विश्व बैंक रिपोर्ट 2012 पर गौर किया जाए तो आबादी के हिसाब से भारत पहला गरीब देश है जहां गरीबों की आबादी सबसे ज्यादा है। पचास रूपए से भी कम कमाई वाले लोग भारत देश से ज्यादा कहीं नहीं है, यह रिपोर्ट भी वल्र्ड वेल्थ हेल्थ रिपोर्ट के जरिए जनवरी 2016 में सामने आई थी। 21.9 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे बताई गई थी, अब आप समझ गए होंगे कि वित्त मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी की गई करोड़पति भारतीयों के आंकड़े का सच कितना गहरा है! हैरानी की बात यह कि अगर इसी आंकड़े पर आयकर विभाग चल रहा है और इसी आंकड़े के तहत अमीर लोग आयकर अदायगी कर रहे हैं तो आमदनी सरकार की या अफसरशाही की, कहीं न कहीं किसी न किसी की पोल जरूर खोल रही है।

पिछले हफ्ते वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए आयकर आंकड़ों के अनुसार 2011-12 में 1 करोड़ से अधिक आय वाले सिर्फ 18,359 लोग थे, जो आयकर चुकाते थे। साल भर के खर्चों के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि यह आंकड़े गलत लगते हैं। उदाहरण के लिए सिर्फ लग्जरी कार बाजार में ऑडी, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज बेन्ज और जगुआर लैंड रोवर ने ही 2011-12 में औसतन 40 लाख रुपए के हिसाब से 25,645 कारें बेची हैं। उस साल मुंबई में लगभग 1880 लग्जरी अपार्टमेंट बिके, जिनकी कीमत 10 करोड़ रुपए से लेकर 100 करोड़ रुपए के बीच है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों में दी गई यह संख्या सिर्फ उतनी है, जितने लोग दिल्ली के सेलेक्ट सिटी वॉक मॉल में शनिवार के दिन आते हैं। लग्जरी घडि़यां, कपड़े, लग्जरी बैग आदि बेचने वाले दिल्ली के लग्जरी मॉल डीएलएफ इम्पोरियो की 2012-13 की आय 113 करोड़ रुपए रही और मुनाफा 61 करोड़ रुपए रहा।

क्या लकीर की फकीर ही रहेगी सरकार? अगर हां तो आंकड़ेबाजी से बाहर कैसी निकलेगी हकीकत! क्या घुनी ही कार्यशैली ही हावी रहेगी देशवासियों पर? ये सब ऐसे सवाल हैं जो सरकार की कार्यशैली पर गंभीर निशान हैं, यूं तो पिछले 3 साल में उ0प्र0, म0प्र0, महाराष्ट्र और दिल्ली सहित देश भर में 200 से ज्यादा चपरासी से लेकर बाबू स्तर तक और कुछ अफसर मिलाकर रंगे हाथों करोड़ से लेकर 800 करोड़ तक, और इससे अधिक की चल अचल संपत्ति के साथ धरे गए मगर सरकार के पास क्या है, वही खोदा पहाड़ निकली चुहिया। अगर सतर्कता विभाग की डायरी और कुछ जांच पर गौर करें तो पिछले पांच साल की हकीकत जो सिर्फ यूपी और राजधानी दिल्ली की पोल खोल रही है और जिसकी हकीकत सामने आ जाए तो सरकार को शर्म लग जाएगी! 900 से ज्यादा करोड़ों रूपए की बेइमानी करने वाले अफसरों की सूची और जांच बताती है, लोकायुक्त सहित तमाम एजेंसियों की हकीकत कहती है कि देश में करोड़पति अफसरों की ही जमात नहीं है बल्कि 3 हजार से ज्यादा संस्था, एनजीओ ही ऐसी हैं जिनसे सरकार को बहुत कुछ हासिल करने की जरूरत है। सीबीआई की डायरी बताती है, कि देश में 3 हजार से ज्यादा नेता, सांसद, मुख्यमंत्री और अफसरशाही ऐसी है जिनकी हकीकत शत प्रतिशत सामने आ जाए तो भी सरकार शर्मसार हो जाएगी। कहने के लिए 30 लोंगो ने देश भर की बैंको का आधे से ज्यादा धन कब्जा कर रखा है मगर कई हजार लोग ऐसे हैं जिन्होंने देश भर की बैंके कंगली की हैं और जिनकी हकीकत सामने रखी जाए तो वित्त मंत्रालय का आंकड़ा ही नहीं लज्जित होगा बल्कि आयकर विभाग की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है, यह सच सामने आ जाएगा।