उच्चतम न्यायालय से कुष्ती करेंगे अंदे पुते माननीय

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कोई खाद्यान्न घोटाले में अंदा! तो कोई षौचालय निर्माण मे पुता! फिर भी मल्हयुद्ध करेंगे उच्चतम न्यायालय से! खैर क्या गर्दन तक सने नेता अब उच्चतम न्यायालय से भी आर पार की लड़ाई करेंगे? क्या सरकारी तिजोरी पर बोझ बनकर लदे कुछ भ्रश्ट माननीयों को उच्चतम न्यायालय का आदेष नहीं सुहाता? समस्या टीम ने जब यह हकीकत लखनउ, मुरादाबाद, गाजियाबाद और देष की राजधानी दिल्ली में कुछ समाजसेवियों, वरश्ठि नेताओं, विषेशज्ञों, पत्रकारों और बहुत सारे अधिवक्ताओं के सामने रखी तो तकरीबन दो दर्जन से ज्यादा लोगों ने स्पश्ट कहा कि उत्तर प्रदेष राज्य की विधानसभा का सदन इतना पावरफुल है कि यहां से आधा दर्जन से ज्यादा प्रधानमंत्री देष को मिले, जिन्होने देष चलाया, मगर यह अफसोस ही कहा जा सकता है कि मीडिया के सामने बड़बोलापन, अखबारों के माध्यम से उच्चतम न्यायालय के आदेष के खिलाफ ओछापन बोलना और बाजू समेटना सिर्फ और सिर्फ भोली भाली आवाम में गलत संदेष पहुंचाना मात्र है, कुछ लोगों ने यहां तक कहा कि सपा की रीढ़ कहे जाने वाले आजम खां से वाहवाही लेने के लिए और पिछले दाग जो फाइलों में छुपे हैं, उनसे पीछा छुड़ाने के लिए बसपा के स्वामी मौर्या ने देष की बड़ी अदालत के फैसले की दुर्दषा करने की कोषिष की। दरअसल मुजफफरनगर दंगे में दोशी बनाए गए कुछ पत्रकारों पर गैर कायदे कानूनी षिकंजे में फंसाए जाने से पहले न्याय के मंदिर ने रोक लगा दी, यानी किया धरा सब पानी क्या कर दिया, कुछ नेताओं ने उच्चतम न्यायालय के आदेष के खिलाफ खूब अंट षंट बका। गरीबों, दलितों और ग्रामीणों के लिए षौचालय बनाने के नाम पर 1200 करोड़ से ज्यादा की बेइमानी करने के आरोप में अंदे बसपा के स्वामी मौर्या बोले उच्चतम न्यायालय को सदन की गरिमा ध्यान रखनी चाहिए, यह अवमानना है जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट से पत्राचार करूंगा। सत्ताधारी दल के विवादित नेता आजम खां ने उच्चतम न्यायालय के फैसले को जेएनयू कांड से जोड़ते हुए एक चैनल पर सवाल उठाए। उ.प्र. के आंगन में 80 सीटों के बजाय सिर्फ दो सीट जीतकर फजीहत बचाने वाली कांग्रेस के प्रदीप माथुर ने भी उच्चतम न्यायालय के आदेष के खिलाफ हां में हां मिलाई। दरअसल मुजफफरनगर दंगे का स्याह सफेद उजागर करने के लिए कुछ पत्रकारों ने स्टिंग आॅपरेषन किया था, जिससे कुछ माननीय बेनकाब हो सकते थे, ऐसे में सत्ताधारी दल द्वारा विधानसभा में एक कमेटी गठित कराई गई कि किसी तरह से स्टिंग आॅपरेषन से खुलासा न हो सके, बल्कि खुलासा करने वाले पत्रकारों पर दमन चक्र चलाया जा सके, फिर क्या कमेटी गठित हुई पत्रकारों को दोशी साबित कराया गया। फिर तो दोशी पत्रकारों पर कार्यवाही करने के लिए तैयारी किए जाने से पहले सारी हकीकत न्याय के सबसे बड़े मंदिर में पहुंच गई। सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने पाया कि सदन के बाहर हुई घटना की जांच सदन में पास हुई कमेटी, किस तरह कर सकती है और यह जांच क्यों कराई गई, अदालत ने यह वो सवाल खड़े किए जिसने कुछ नेताओं को षर्मसार कर दिया। उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई करते हुए पाया कि विषेशाधिकार के नाम पर यह सब गैर कायदे हुआ ऐसे में पत्रकारों पर कार्यवाही से पहले यूपी सरकार से चार हफते में जबाव दाखिल करने का आदेष पारित करते हुए न्याय के मंदिर में न सिर्फ कुछ नेताओं के ही मंसूबे पर पानी फेर दिया बल्कि सदन में गैर कायदे कुछ भी पास होने के लिए भी चेताया गया। बहरहाल मामला देष की सबसे बड़े न्यायालय में विचाराधीन है, आगे क्या होगा यह समय बताएगा। फिलहाल हम आपको बता दें कि दो जून की रोटी कमाने खाने में जीवन बसर करने वाली करोड़ो आवाम आज भी ऐसी भी है जिसे न्यायालय की जानकारी नहीं और हैरान करने वाली बात यह कि भोली भाली जनता कुछ नेताओं की नियत और बेइमानी भी नहीं जानती। यही नहीं उ.प्र. राज्य के 37 हजार से ज्यादा गांव और मजरे आज तक सड़क परिवहन से दूर हैं, मिट्टी के तेल से दीपक की रोषनी में जिंदगी काट रहे ऐसे लोंगो तक उच्चतम न्यायालय के आदेष के खिलाफ अंट षंट बोलकर कुछ नेता क्या संदेष पहुंचाना चाहते हैं, ऐसे सफेदपोष क्या हासिल करना चाहते हैं यह तो चैकानी वाली बात है मगर यह सच है कि कैमरे के सामने अखबार और चैनलों में देष की सबसे बड़ी अदालत के फैसले के खिलाफ बोलना और बाजू समेटना यह न सिर्फ कोर्ट आदेष का उल्लंघन है बल्कि जनता को न्याय के खिलाफ भड़काए जाने जैसी कीचड़युक्त भड़ास है।

हमारा मक्सद नेताओं की ईमानदारी पर सवाल खड़े करना नहीं है मगर यह सच है कि 403 विधायकों वाली उ.प्र. विधानसभा देष की सबसे बड़ी वह विधानसभा है जहां ईमानदार और काबिल माननीयों की ही कमी नहीं है बल्कि बेइमान, हत्यारे, बलात्कारी, अपहर्ता और सरकारी जमीन कब्जाने वाले सफेदपोष की भी लंबी फेहरिस्त है, उदाहरण के लिए 16वीं विधानसभा में आने के लिए 69 विधायकों ने जेल से पर्चे भरे थे। यही नहीं पिछले 9 साल में 24 से ज्यादा वह विधायक लोकायुक्त सहित तमाम अन्य जांच में दोशी पाए गए, अदालती कार्यवाही में दोशी पाए जाने के बावजूद न सिर्फ मंत्री पद पर, चेयरमैन पद पर, राज्यमंत्री के पद पर लदे रहे बल्कि लालबत्ती लगी लग्जरी सरकारी गाडि़यों में जनता की गाढ़ी कमाई पर मौज करने वाले नेताओं में आज भी कमी नहीं आई।
-राश्ट्ीय समस्या ब्यूरो