ऐसे विधायक जी तो प्रधानमंत्री बना देंगे सपा मुखिया को

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डीजीपी साहब आप भी देखिये! ऐसे कप्तान को राष्ट्रपति पदक दिलाइये

विधायक गुरू जी, तो एसएसपी साहब सकर हो गये। ऐसी जोड़ी कि सरकार की बची साख भी …। मुलायम सिंह लाख दांती किटकिटायें कि जनप्रतिनिधियों की करतूत के चलते लोकसभा चुनाव में साइकिल पंचर हुयी। शिवपाल यादव कुछ भी कहें कि उन्हें पता है उनका कुनवा कहां क्या गुल खिलाता है, मगर हकीकत तो जनता जिस तरह भुगत रही है उसका सर्टिफिकेट तो मिशन 2017 में ही जारी होगा। मुलायम सिंह ने कल भी मैनपुरी में कहा कि प्रधान जनता की समस्यायें सुनें, कोई समस्या हो तो हमें बतायें। जनप्रतिनिधि सिर्फ कारोबार में लगे हैं, ये अलफाज कई सांसद सीट गवांने के बाद भी सपा मुखिया की तरफ से कहे गये और कल मैनपुरी में भी कहा कि जनप्रतिनिधि की लापरवाही से जनता की समस्यायें बढ़ गयी हैं। अब जानिये मुरादाबाद नगर विधायक यूसुफ अंसारी और वर्दीधारी आईपीएस नितिन तिवारी की वह कारगुजारियां जिनकी हकीकत अगर सीबीआई जांच करे अथवा उच्चतम न्यायालय के पटल तक पहुंचे तो गृह विभाग उत्तर प्रदेश को ही फजीयत बचानी मुश्किल होगी, बल्कि साइकिल पर सवार ऐसे विधायकों की लौ में सपाई किला भी झुलस सकता है। हम दर्जन भर से ज्यादा हुयी कथित दुकानदारियों पर प्रकाश नहीं डाल रहे, हम चार साल की विधायक निधि जो तकरीबन 12 से ज्यादा मदों में खर्च होती है, उधर नहीं पहुंच रहे, हम फोटोग्राफी और हुये गोरखधंधे की कागजी कार्यवाही भी नहीं दिखा रहे, हम सिर्फ उन सौ तक लोगों की पीड़ा पत्रकार की हैसियत से सिर्फ जनता और सपा मुख्यालय में रखे जाने के लिए लिख रहे हैं जो कारगुजारी कप्तान की हैसियत से नितिन तिवारी और जनमसीहा की हैसियत से यूसुफ अंसारी की तरफ से की गई। यूं तो तकरीबन 5 हजार गज जमीन पचासों साल से धार्मिक संस्था हयातुल उलूम के नाम पर, और संस्था काबिज है, मगर सरकार में मलाईदार विभाग नहीं मिला तो विधायक जी की नियत डोली और ऐसी मंडली बनाई, ऐसे चहेतों की टोली को ऐसी करतूत के तहत सौंपी गई कि पुरानी कमेटी और सदस्यों में ही छीछालेदर फैल गयी। जमीन कब्जा होते देख सैकड़ों लोग जनप्रतिनिधि के रास्ते में रोड़ा बने, फिर क्या विधायक जी से टकराने का मतलब वर्दीधारी की लठिया बजने लगी। कारोबार में टांग अड़ाना ऐसा भारी पड़ा कि रातों रात कटघर थाना झोपड़ पट्टी में बदल गया, एसओ कुनवा सहित ही अर्दली में नहीं लग गये, बल्कि निर्दोष सौ लोगों को अदालत तक धकियाने के लिए एसएसपी साहब ने कसर नहीं छोड़ी। फिलहाल हम आपको बता दें कि यूं तो मुरादाबाद मण्डल में 17 से ज्यादा वह घातक धाराओं में जकड़े खतरनाक बदमाशों का मुरादाबाद पुलिस पिछले 6 सालों में बाल बांका नहीं कर सकी, चुनाव आयोग की सख्ती के बावजूद आईजी बरेली जोन की लाख कोशिश के बाद भी ऐसे घातक अपराधियों को पुलिस नहीं पकड़ पाई, मगर निर्दोषों पर लठिया चलाने की बात आई, जमीन की खरीद फरोख्त का मामला दिखा तो न सिर्फ संस्था बचाने वाले 100 लोग ही मार्च 2016 अन्तर्गत अंदर किये गये बल्कि दिल्ली रोड पर स्थित एक बेशकीमती जमीन में सौदेबाजी के चलते एक सैक्षिक संस्था चलाने वाले शिक्षित और समाजसेवी परिवार के तीन बुजुर्गों को रातों रात उठाकर पुलिस ने जो घिनौनी हरकत अस्पताल में पड़े एक सर फूटे हुए आदमी के नाम पर फर्जी तरीके से जो ताना बाना बुना जिसकी हकीकत बड़ी अदालत में नहीं, बड़ी जांच एजेंसियों में नहीं बल्कि पुलिस महानिरीक्षक बरेली जोन के सामने रखी जाये तो नागफनी पुलिस को बहुत कुछ झेलना पड़ सकता है। बहरहाल यह सच है कि सपा मुखिया का राजनीतिक जीवन सिर्फ इसलिए लोकसभा चुनाव में दागदार हुआ क्योंकि सौदागर जनप्रतिनिधियों की कमी नहीं है।
मगर यह उससे भी हैरान करने वाली बात है कि पुलिस के बाद आईपीएस अफसर भी अर्दली बनकर काम करते हैं, यह वैधानिक गलत के अलावा जनता के साथ हो रहे अनर्थ का पाप भी ..। बहरहाल एसएसपी से पूछा गया कि निर्दोष लोगों पर रातों रात मुकदमा कायम हुआ, इतना अरसा गुजर गया, आपने क्या किया? अगर किया तो जाचं किस अफसर को सौंपी गई? हनकदार आईपीएस साहब दो टूक बोले जांच चल रही है।