सचिव व प्रमुख सचिव फंसे कानूनी फंदे में

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समस्या टीम

सदस्य सचिव यूपीपीसीबी और प्रमुख सचिव आबकारी की गर्दनें उस समय कानूनी फंदे में फंस गईं, जब 5 अगस्त 2020 के दिन एक्स न्यायमूर्ति श्री राठौड़ ने कानूनी कार्यवाही लिख दी, यही नहीं रेडिको खैतान से भी की जा सकती है 11 सौ से 12 सौ करोड़ तक की वसूली। दरअसल अति प्रदूषणकारी इकाई रेडिको खैतान रामपुर के विरूद्ध एक याचिका में सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश एनजीटी मिस्टर आदर्श कुमार गोयल की खंडपीठ ने 15 जनवरी 2020 के दिन इसकी जांच सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति मिस्टर एस0वी0एस राठौड़ को सौंप दी, यही नहीं इससे पहले 2019 में भी इसी मामले पर सुनवाई करते हुए प्रधान खंडपीठ एनजीटी ने रेडिको खैतान की जांच सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्री अरूण टंडन को सौंपी थी, उस समय भी रेडिको खैतान अति प्रदूषणकारी इकाई मिली, कानून का उल्लंघन करके चलती मिली, वरिष्ठ अफसरों की शरण में चलती मिली, यहां तक कि प्रमुख सचिव आबकारी विभाग और सदस्य सचिव यूपीपीसीबी श्री आशीष तिवारी द्वारा किए गए पद के दुरूपयोग के गंभीर साक्ष्य पकड़े, दोंनो अफसरों ने भारत सरकार के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 3 बार पत्रावली तक लिख दीं कि रेडिको कंपनी को न फंसाया जाए और बोर्ड ने जो भी इसके विरूद्ध बंदी आदेश जारी किया, उसे बापस ले लिया जाए। मगर यह सारा गोरखधंधा उस समय उजागर हो गया जब न्यायमूर्ति श्री अरूण टंडन ने जांच की और वैसी ही रिपोर्ट एनजीटी में दाखिल कर दी। रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश एनजीटी श्री गोयल की खंडपीठ ने आदेश किया कि रेडिको खैतान को चलवाने वाले सभी अफसरों पर कार्यवाही करें मुख्य सचिव और गैरकायदे व कानून का उल्लंघन करके चली रेडिको खैतान के विरूद्ध मोटी वसूली की जाए। उस समय मुख्य सचिव उ0प्र0 शासन द्वारा कार्यवाही टरकाने के प्रयास किए गए लिहाजा जनवरी 2020 में एनजीटी ने पुनः यह जांच न्यायमूर्ति श्री राठौड़ को सौंप दी। रेडिको खैतान में प्रवेश करते ही न्यायमूर्ति द्वारा सवाल किया गया कि बंदी आदेश के बावजूद रेडिको क्यों चल रही? इस पर कंपनी के मैनेजर ने जबाब दिया कि उसे वरिष्ठ अफसरों का संरक्षण मिला हुआ है, इसके बाद न्यायमूर्ति ने केन्द्रीय भूजल भारत सरकार से सवाल किया कि बिना एनओसी जल दोहन करने वाले रेडिको के खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं की गई? तो जबाब मिला कि दिल्ली हाइकोर्ट में मामला लंबित है, इस पर सख्त हिदायत देते हुए न्यायमूर्ति ने केन्द्रीय भूजल को चेताया कि एक महीने में आवेदन निस्तारित करें और इसके विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जाए। 5 अगस्त 2020 के दिन एनजीटी में जबाब देते हुए न्यायमूर्ति ने मुख्य सचिव उ0प्र0 शासन को सख्त चेतावनी दी कि रेडिको खैतान को चलवाने वाले सभी अफसरों की सूची बनाकर एक हफ्ते में जबाब दें मुख्य सचिव, इसके अलावा 17 फरवरी 2019 से 11 मई 2019 तक कानून का उल्लंघन करके चलाई गई कंपनी ने जितना भी उत्पादन किया, जितनी रकम का माल बनाया वह सारा वसूल किया जाए, साथ ही 2016 से अभी तक कुल किया गया जल दोहन का जुर्माना भी वसूला जाए, पर्यावरण नियम के तहत जो भी जुर्माना तय किया गया, वह भी वसूला जाए, इसके अलावा प्रमुख सचिव आबकारी विभाग द्वारा लिखे गए दोंनो पत्र दिनांक 02.04.2019 और इससे पूर्व के साथ साथ सदस्य सचिव यूपीपीसीबी श्री आशीष तिवारी द्वारा लिखा गया पत्र दिनांक 01.04.2019 की ऐवज में दोषी अफसरों पर सख्त कार्यवाही की जाए, इसके अलावा मुख्य सचिव यह भी जांच करें कि रेडिको को चलवाने वाले ऐसे और कितने अधिकारी हैं, हालांकि यूपी शासन के रिकार्ड के अनुसार 2019 में प्रमुख सचिव आबकारी के पद पर श्रीमती कल्पना अवस्थी तैनात रहीं, जहां से दो बार पत्र लिखा गया। फिलहाल हम आपको बता दें कि केन्द्रीय प्रदूषण बोर्ड से लेकर केन्द्रीय भूजल प्राधिकरण तक मनमानी करने वाले मतलब झोल करने वाले अफसरों की खासी तादाद है, मगर यूपी में इससे बड़े भ्रष्ट अफसरों की लंबी जमात है, मतलब शासन से लेकर जिला स्तर तक न जाने कितनी लंबी फौज की फौज है। अब आप यह समझ रहे होंगे कि रेडिको खैतान पर 11 सौ से 12 सौ करोड़ तक की वसूली क्यों की जा सकती है, इसके लिए आपको हम समझाते हैं सरल तरीके से कि जून 2020 में रेडिको ने बनाई बेची 409 करोड़ की दारू और फायदा हुआ 44.87 करोड़। इसी तरह जून 2019 में बनाई 623.58 करोड़ की दारू और फायदा हुआ 54.77 करोड़ का। यही नहीं मार्च 2019 में बनाई 509.98 करोड़ की दारू और फायदा हुआ 39.05 करोड़। इसी तरह मार्च 2020 में बनाई 585.36 करोड़ की दारू जिसमें फायदा हुआ 38.45 करोड़। अब आप आसानी से समझ गए होंगे कि मार्च 2019 मतलब सिर्फ एक महीने में 509.98 करोड़ की दारू बनाई तो 17 फरवरी 2019 से लेकर 11 मई 2019 तक 3 महीने में कितने रकम की दारू बन सकती है, यह समझना बेहद आसान है। मगर हम आपको यह भी बता दें कि यह सारी कार्यवाही प्रधान खंडपीठ एनजीटी में विचाराधीन है, हो सकता है मात्र 3 महीने का लाभ ही वसूला जाए, हो सकता है जितनी दारू बनाई बेची वह सारी वसूली के आदेश किए जा सकते हैं, मगर यह भी सच है कि भूजल और पर्यावरण नियमावली के तहत लगने वाला जुर्माना लगभग 30 करोड़ से ज्यादा की वसूली के साथ ही 3 महीने में बनाए गए कुल माल के फायदे की वसूली से बच सके कंपनी, यह समझना साथ ही जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाली दोषी कंपनी को बचाने वाले भ्रष्ट अफसर बच सकेंगे, यह उम्मीद करना समझ के बाहर है।