मोदी जी! कोई अच्छा काम बताइये

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ग्राम सभा चमकाने में मन नहीं लगता माननीयों का

न पानी का प्रदूषण, न धुएं का प्रकोप! प्रचंड गर्मी में भी हरियाली और जगमगाहट यह लेख नहीं, जयापुर गांव की हकीकत है। प्रधानमंत्री का गांव नहीं बल्कि देश भर के 4835 नेताओं के लिए नसीहत भी है। 9 ग्राम सभाओं में हुआ है काम! जयापुर गांव देखकर भले ही शहर शर्मनाक हो जाएं मगर तकरीबन 71 सांसद आज भी ऐसे हैं जिन्होंने गोद लेने के लिए चलन तो पूरा किया मगर जमीनी हकीकत यह कि 62 से ज्यादा सांसद सिर्फ संदेशा भेजकर खेती करा रहे हैं। पढ़कर तो अजीब लगेगा मगर सच यही है अगर यह कहें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हनकदार माननीयों को उनके वजन मुताबिक जिम्मेदारी नहीं सौंपी तो कतई गलत नहीं होगा। शायद प्रधानमंत्री को यह बात कतई नहीं मालूम कि ग्रामसभा गोद लेने में माननीयों को शर्म आ रही है। खैर अनाज बैंक से लेकर अस्पताल और धर्मशाला, सड़क, बिजली, पानी, आवास से जगमगाया जयापुर गांव में भले ही सरकारी बिजली गुल रहे मगर प्रधानमंत्री के गांव में अंधेरा नहीं होता है, यह सच हो गया। यूं तो राहुल और सोनिया सहित 2 सीटें कांग्रेस के पास वहीं 5 सीटों पर परिवार सहित सपा मुखिया का कब्जा रहा, मगर 73 सीटों पर जीतकर आए भाजपा सांसदों में से 66 तक सांसद ऐसे हैं जिन्होंने क्षेत्रीय समस्याएं दूर करने के लिए कोई ठोस कार्य किए जाना तो दूर एक बल्कि गोद ली गई ग्राम सभा भी दुर्दशा से दूर नहीं कर पाई। लोकसभा से दिख रही वी.के.सिंह (गाजियाबाद) की ग्रामसभा ही सवालों के घेरे में नहीं है बल्कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई दिग्गजों के गांव नेताजी को याद कर रहे हैं।