फिर भी चलो गांव की ओर देखो लूट मची है

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अरबों में खुदाई करोड़ों में सौंदर्यीकरण, लाखों का जल भराव का मसला किस अदालत में जाएगा

शैलेश सिंह
सरकार कहती है पहले मुझे बताओ! अफसर कहते हैं लिखकर दो! मगर असलियत यह कि शिकायत की तो गांव घर छोड़ो, आरटीआई लगाई तो जिला या राज्य छोड़ो, छापा गया तो सिर्फ वाहवाही की तश्वीरें छापो। बहरहाल लाख छुपाए फिर भी नहीं बची फजीहत! बुंदेलखंड में बयान बाजी किए कि विकास काम हो रहा है, आलोक रंजन के इस बयान के बाद भूख और प्यास से बिलखती आवाम के सामने सरकारी दफ्तर में बांदा मण्डल के जल संस्थान अफसर दारूबाजी करते हुए मीडिया के कैमरे में कैद हुए, किस तरह भयावह तश्वीरें राष्ट्रीय समस्या टीम ने पिछले हफ्ते तीन बार जनता और सरकार के सामने रखीं इसके बावजूद भी अफसरों में भय नाम की चीज नहीं, भले ही मुख्यमंत्री सप्ताह भर में दो दौरे सिर्फ बुंदेलखण्ड के किए, 14 करोड़ का भूसा आवारा जानवरों के नाम पर डकारे जाने की बात सामने आई तो पशुधन अधिकारी को निलंबित किया मगर प्यासे लोंगो को पानी देने की जिम्मेदारी लेकर बैठे जल संस्थान के अफसरों के सामने शासन और सरकार सभी गूंगे और बहरे की स्थिति में रहे और यह आलम उस समय रहा जब 38 करोड़ से ज्यादा की रकम फरवरी से लेकर अप्रैल तक धन की तरह सिर्फ प्यास बुझाने के नाम पर दी गई। बहरहाल भूखे जानवर हों या प्यासे लोग हम यहां सिर्फ उन सूखे मनरेगा तालाबों की हकीकत दिखा रहे हैं जो अरबों रूपए में खोदे गए, करोड़ो में सौंदर्यीकरण इसके अलावा लाखों में हर साल होने वाला जल भराव के बावजूद न कहीं पेड़ के नाम पर टहनी बची और न ही चिडि़या पंक्षी और मवेशियों के लिए पानी। अगर यह कहा जाए कि हरदोई जिले के 19 ब्लाकों में 1100 से ज्यादा तालाब सिर्फ बूत हैं, सीतापुर के 19 ब्लाकों में 900 से ज्यादा तालाबों में सिर्फ और सिर्फ बेईमानी छुपी है, मैनपुरी के किशनी, घिरोर, बेबर, सहित 300 से ज्यादा तालाब ब्लाक स्तर के अफसरों और प्रधानों की जेब खर्ची का जरिया रह गये, बात करें मुरादाबाद और अमरोहा की तो स्थिति और भी बदतर उस समय है जब मनरेगा योजना में हुयी मनमानी के चलते सीबीआई का तम्बू सूबे भर में पिछले तीन साल से गड़ा हुआ है।

गंगा तट पर बसा फर्रूखाबाद भी सूखा

फर्रूखाबाद। सच्चाई दिखाने के लिए नवाबगंज ब्लाक क्षेत्र का यह तालाब जो किसी सूखे खंडहर अथवा चट्टान को ही मात दे रहा मगर ऐसे ही 108 तालाब ब्लाक की आवाम और प्यासे मवेशियों को उस समय चिढ़ा रहे हैं जब मुख्यमंत्री जल बचाओ योजना से लखनऊ की चकाचैंध अखबारों की सुर्खियां बना हुआ है। धन की हकीकत तो यह कि करोड़ों रूपए की लागत से इन तालाबों की खुदाई केन्द्रीय योजना मनरेगा अंतर्गत कराई गई और लाखों रूपए इन तालाबों को लबालब करने के लिए हर साल पानी की तरह बहाए जाते हैं, मगर जमीनी हकीकत यह कि ऐसे तालाब में प्यास से तिलमिलाई चिडि़यां भी गिर जाए तो तत्काल जल जाएगी । ब्लाक के फतनपुर, जिराऊ, वीरपुर, वेद, भटासा और रूखईया सहित 70 ग्राम पंचायतों में कुल 108 तालाब आज उस समय पालतू और आवारा जानवरों के अलावा चिडि़यां पंक्षियों को चिढ़ा रहे हैं जब इस योजना में सूबे के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश और उनका शासन मुख्यमंत्री जल बचाओ योजना की वाहवाही लूट रहा है, अखबारों में फोटो छपवाने के लिए भी सुर्खियां बने हुए हैं, मगर जमीनी हकीकत यह कि ऐसे तालाब हर साल केन्द्र और राज्य से मिलने वाले बजट को सफाया करने का जरिया बने हुए है। फर्रूखाबाद जिले के ही दूसरे ब्लाक कमालगंज की बात करें तो एरिया में 116 तालाब मनरेगा योजना के तहत खोदे गए जिनमें कई तालाब तो हर साल खुदाई किए जाने की ओट में सिर्फ जेब विकास अधिकारियों की भेंट चढ़ते हैं, जमीनी हकीकत यह कि दसों साल का शासनकाल ही नहीं बल्कि केन्द्र की सरकार भी शर्मसार हो जाएगी। बहरहाल बीडीओ शिव प्रकाश बताते हैं कि कुल 116 तालाबों में 30 तालाब ऐसे हैं जिन्हें मुख्यमंत्री जल बचाओ योजना में शामिल किया गया है, 46 तालाब सौदर्यीकरण, 16 अन्य योजनाओं लिए हैं। फिलहाल हम आपको बता दें कि सीएम जल योजना के 30 तालाब हों या दुल्हन की तरह सजाने के लिए लिखे गए 46 तालाब जो आज बूंद बूंद पानी के लिए खुद प्यारे हैं शायद इंद्र देव का शासन ही इनकी प्यास बुझाएगा, रहे बचे 16 तालाब जो अन्य बहुत सारी योजनाओं से मिलने वाला धन की खपत करने की इंतजार कर रहे हैं।

बदतर लोहिया गांव तो मुख्यमंत्री की पोल खोल रहा

समसाबाद (फर्रूखाबाद)। यूं तो 13 से ज्यादा लोहिया गांव बद से बदतर स्थिति का दंश सिर्फ फर्रूखाबाद में झेल रहे, मगर अफसरों को सिर्फ एक गांव की तश्वीर भी सच नहीं लग रही। कहने को बैहटा बल्लू 2014-15 अन्तर्गत जिलाधिकारी एन0के0एस0 चैहान की तैनाती के दौर में सजाया गया, मगर सपा शासन की रीढ़ कही गई लोहिया गांव योजना किस तरह नोची खाई गई, इसकी हकीकत सिर्फ बैहटा बल्लू गांव सच उगल रहा है। 500 लोगों को चिढ़ाने के लिए मात्र एक खड़खड़ा हैण्डपम्प। मिट्टी का तेल नहीं, राशन नहीं, इन्दिरा या लोहिया आवास नहीं, बिजली, पानी तो दूर अफसर भी कोसों दूर, यहां कोई लेखपाल भी आकर झांकने को तैयार नहीं। 450 से 500 की आबादी वाले इस गांव में सरकार की तरफ से सिर्फ एक हैण्डपम्प लगाया गया था, जो पिछले तीन महीने से सिर्फ बूत बनकर रह गया, प्यासे लोगों को आज भी उस समय चिढ़ा रहा है, जब ब्लाक से लेकर जिला मुख्यालय तक कई शिकायतें गई, यहां तक कि प्रधान सुमन के भाई अवधेश के मुताबिक अफसर इस गंाव की तो दूर गांव में लगे हैण्डपम्प को पिछले तीन महीने में रीबोर तक कराने की सुध नहीं ले रहे हैं। बहरहाल ठूठ रह गये इस हैण्डपम्प के बारे में जब ब्लाक स्तर पर बताया गया, तो बयानबाजी में माहिर अफसर तत्काल सुधारने की बात कहने लगे। मगर कब गांव में हैण्डपम्प लगेंगे, कब इकलौता खराब पड़ा हैण्डपम्प सही किया जायेगा, कौन और कब विधायक निधि जरूरतमंदों के सामने पहुंचेगी, यह ऐसे कुछ सवाल हैं, जिनमें लाखों रूपये खर्च हो जाने की हकीकत सरकारी पोथियों में लिखकर दबाई गईं। मगर स्थिति क्या है, यह आप सब के सामने है।

बंद पड़े नलकूप, बूत बना खड़ा टैंकर

कहने के लिए फर्रूखाबाद नगर पालिका एरिया पुराना धार्मिक क्षेत्र है, लाखों की आबादी हर स्नान पर रूबरू होती है, मगर हकीकत यह कि नगर पालिका चेयरमैन न सिर्फ सरकारी खजाने पर बोझ बनकर लदे हैं, बल्कि हकीकत यह कि सुरक्षा घेरा लेकर चलने वाले यादव जी सिर्फ निजी कोल्ड स्टोर, काॅलेज और निजी कारोबार तक ही सिमटे रहते हैं। दूर दूर तक गंगा तट पर बसा फरूखाबाद जिला की नगर पालिका के पास 4 टैंकर और शहर में 42 नलकूप नगर पालिका द्वारा संचालित किए जा रहे हैं मगर जमीनी हकीकत यह कि ज्यादातर जनता प्यास बुझाने के लिए दूर दराज पर लगे हैडपंप से जाकर प्यास बुझाती है साथ ही कनस्तरों में भर भरकर परिवारी जनों को पानी पहुंचाया जाता है। बात करें 4 टैंकरों की तो एक नगर पालिका परिसर में हर समय बूत बनकर खड़ा रहता है, दूसरा टैंकर अक्सर निर्माण काम में दौड़ाया जाता है वहीं दो बचे अन्य टैंकरों की अंदरूनी हकीकत यह कि शायद पानी बेचकर ही खर्ची की किल्लत दूर की जा सके।