मुख्य सचिव भी बयान बहादुर हो गए!

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कागजों में 27 हजार लग चुके हैडपंप बांदा जिले में, हकीकत यह कि जिले में आधे भी हैडपंप का निशान नहीं। अफसोस यह कि अभी तक सरकारी बजट पर बंदरबांट होती रही, सब सांसद, विधायक निधी भी अलोप होने लगी। उससे भी शर्मसार करने और गरीबों को चिढ़ाने वाले बयान अभी तक नेता या मुख्यमंत्री करते रहे मगर अब अफसर छलांग लगाते हैं, यह हैरान करने वाली बात है। पिछले दिनों शासन और प्रशासन ने ही 27 हजार हैडपंप लगाने का ढिं़ढ़ोरा नहीं पीटा बल्कि बुंदेलखंड के बजट को मिलाकर सांसद और विधायक निधि भी इन्ही हैडपंपों में खपत  हुयी। अब आप नियम पढि़ए, मानक के हिसाब से 150 लोंगो पर 75 मीटर की दूरी पर एक हैडपंप लगाया जाता है, इस हिसाब से बांदा जिले में 13500 हैडपंप की जरूरत है, काश! यह जमीन पर होते तो लोंगो को पानी के लिए हाय तौबा की जरूरत नहीं थी। बेईमानी देखिये बांदा में मानक से दो गुना हैडपंप यानी 27000 हैण्डपम्प लग गए, फिर भी मासूम, बुजुर्ग, महिला और पुरूष बूंद बूंद पानी के लिए भटक रहे, यहां तक कि कारागार अधीक्षक के पास जल निगम को छोटे से अफसर ने सरकार की सारी पोल ही खोल दी कि जो 2700 हैडपंप रिबोर होने की सूची बनाई गई थी जिनके लिए 15 करोड़ रूपए की जरूरत थी उसमें  सिर्फ शासन ने बुन्देलखण्ड के बजट से 3.25 करोड़ दिए है, जिससे 600 हैडपंप ही रिबोर हो सकते हैं, सांसद, विधायक निधी मिलाकर 15 करोड़ आने थे, अभी तक पता नहीं है। खैर बुन्देलखण्ड के विकास पर केन्द्र ने पूछा तो मुख्य सचिव आलोक रंजन ने दो टूक जवाब दिया विकास काम हो रहा है। अगर यह कहा जाये कि नेताओं से चार कदम आगे निकलकर मुख्य सचिव उ.प्र. ने जबाव दिया है तो इसलिए गलत नहीं है, क्योंकि स्वयं रंजन साहब ने दौरा किया, विकास काम होने की बात कही। मगर अगले ही दिन जल निगम के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार मिश्र मंहगी दारू/बीयर पीते हुए अपने ही सरकारी दफ्तर में मीडिया के कैमरे में कैद हुए। पूछा गया यह सब क्या है? बोल पड़े ‘‘नो वाईन ओन्ली बियर’’। अब आप समझ गये होंगे कि वही जल निगम के अफसर जिन्हें 138 करोड़ रूपये की रकम 20 फरवरी 2014 के रोज आनन फानन में सौंपे जाने की बात शासन में कही गई थी, 5 हजार की आबादी वाले सौ गांव में 12 करोड़ की लागत से वाॅटर एटीएम और 417 वाॅटर टैंक खरीदे जाने के लिए जिलाधिकारी की अगुवाई में दस करोड़ की लागत का जिम्मा भी जल निगम को सौंपा गया था, जल निगम को सौंपा गया था। कृषि आयुक्त प्रवीण कुमार की अगुवाई में नये हैण्डपम्प लगाये जाने के लिए 40 करोड़ रूपये पंचायती राज विभाग को सौंपे गये थे, 3500 खड़खड़ा हैण्डपम्प मरम्मत की जिम्मेदारी पंचायती राज को अलग से सौंपी गई, बावजूद मुख्य सचिव का दौरा और बंद कमरे में हुई मुलाकात की पोल न सिर्फ दारू और बीयर पीने से ही खुल गई बल्कि सिर्फ बांदा जिले के बीसों गांवों में प्यासे महिला पुरूष और बच्चों की टोलियां डब्बे कनस्तर लेकर नदी तक गहरे कुंए तक जाते हुए झुण्ड के झुण्ड देखे गए।