महामारी के समय मिली शुद्ध हवा

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शैलेश सिंह

11 साल बाद मिली षुद्ध हवा! दषक बाद राहत की सांस ली बच्चो और बुजुर्गो ने। अगर कहें कि जमाने बाद दिल्ली की साढ़े तीन लाख से ज्यादा उस आबादी को षुद्ध हवा मयस्सर हुई जो टीबी और सांस जैसे गंभीर रोग से जूझ रही है तो 100 फीसदी सत्य है। वजह महामारी हो या अपने नेता की पहल मगर सच तो यह कि आज दिल्ली की हवा का पैमाना शुद्ध से भी ज्यादा शुद्ध देखा जा रहा है। पीएम 2.5 जहां आज 53 और 47 को छू रहा वहीं पीएम 10 भी 100 से नीचे 90 तक आसानी से देखा जा रहा। यूं तो 2015 से ही राजधानी दिल्ली स्माॅग चेबर के नाम पर देष और दुनिया भर को डराती रही, उच्चतम न्यायालय और एनजीटी के लाख प्रयास के बाद भी हालात स्माॅग चेंबर बनने से नहीं बच पाए, मगर महामारी यानी कोरोना जैसी आफत के समय राजधानी ही नहीं बल्कि नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुड़गांव, दिल्ली के साथ साथ लखनउ और आगरा के भी हालात में काफी बदलाव हुआ, यह दूसरे रूप में सही मगर बड़ी राहत है। बात करें शुद्ध हवा की तो सीपीसीबी की गाइडलाइन के मुताबिक पीएम 2.5 का सामान्य स्तर 60 एमजीसीएम और पीएम 10 का सामान्य लेवल 100 एमजीसीएम निर्धारित है मगर असलियत यह कि देष की राजधानी पिछले 10 साल से इस पैमाना को छूने के लिए नसीब के दिन में भी मतलब अगस्त माह में भी तरसती रही, यह मनमानी और नियम शर्तो को कचरा समझने के सिवाय कुछ और नहीं है। यूं तो मिट्टी, पानी और हवा की सेहत के लिए स्वयं उच्चतम न्यायालय ने अलग अलग एजेंसियां और अलग अलग नियम शर्ते दी हैं मगर मिट्टी, पानी और हवा की सेहत में सुधार होगा, यह सोचना भी सिर्फ बेइमानी है मतलब पिछले 23 साल से न सिर्फ कानून को ही बल्कि देष के साथ सिर्फ धोखा हो रहा है। यूं तो पिछले 5 साल से कभी पराली के नाम पर किसानों को, कभी 2 करोड़ से ज्यादा वाहनों को लगातार दिल्ली में कोसा गया, अदालती कार्यवाही कराई गई मगर सच तो यह कि सिर्फ 5 जिलों मतलब गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद और गुड़गांव की हजारों ईट भट्ठे, टायर जलाकर तारकोल बनाने वाले उद्योग, तांबा पीतल के लिए तार जलाने वाली भट्ठियां, स्टील प्लांट, पेपर मिल, दारू मिल, स्लाॅटर हाउस, सीमेंट कारखाने जो दिल्ली ही नहीं सारे एनसीआर की दम फुलाते रहे, यह सच्चाई छुपाई गई, यह समझाने के लिए हम आपको दूसरे तरीके से प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल हम आपको बता दें कि राजधानी दिल्ली के 1.9 करोड़ चार व दो पहिया वाहन मतलब मतलब लगभग 70 लाख दो पहिया और 32.46 लाख कार एवं जीपें ठहरी हुईं है और इस समय दिल्ली की हवा का पैमाना पीएम 2.5 53 एंव 47 और पीएम 10 का पैमाना 100 एंव 90 है इसी तरह गाजियाबाद का पीएम 2.5- 166, नोएडा का 130, फरीदाबाद का- 187, गुड़गांव का- 127, लखनउ का- 204, आगरा का- 108 रहा। अब आप आसानी से समझ गए होंगे कि कोरोना जैसी महामारी के समय न सिर्फ राजधानी दिल्ली बल्कि गाजियाबाद, लखनउ, आगरा, नोएडा, गुड़गांव, फरीदाबाद तकरीबन सभी जगह ठहराव है मतलब गाड़ियां नहीं चल रहीं बावजूद लखनउ, गाजियाबाद और फरीदाबाद की हवा में ज्यादा बदलाव नहीं है मतलब साफ है कि रात का अंधेरा हो या दिन का उजाला या हो पड़ोसी जिलों का असर मगर कहीं न कहीं औद्योगिक गतिविधियां भी हवा में सुधार नहीं होने दे रहीं।