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यह कैसा वायु गुणवत्ता आयोग?

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जिसमें नीति नहीं, स्टडी और प्लानिंग के अफसर नहीं,
शुद्ध हवा के कोई ठोस प्रयास नहीं, हवा के दोषियों को सजा नहीं

  • बिना नीति का आयोग?
  • प्लानिंग-स्टडी विहीन अफसर?
  • तभी तो- 62 लाख पुराने वाहनों की 62 लाख बैटरीयां, और बैटरी वेस्ट कानून, दोनों कुएं में झोंक दिए?
  • हजारों टन ई-वेस्ट और ई-वेस्ट कानून, दोनों नदी में बहा दिए?
  • आबादी भी तबाह करा दी? प्रदूषण भी बढ़ गया? और
  • हवा के गुनहगार भी बचा दिए?

( निशांत सिंह )
आयोग को शुद्ध नियत, मजबूत नीति से चलना चाहिए!
सुप्रीम कोर्ट को भी जन तबाही के फैसलों से बचाना चाहिए?
अधूरी रिपोर्ट, बिना प्लानिंग, बिना स्टडी, बिना सुझाव की रिपोर्ट, सुप्रीम सुनवाई में नहीं देनी चाहिए! अब देखो- 62 लाख वाहन मतलब आबादी भी तबाह? और प्रदूषण भी बढ़ गया? अगर नियम और आदेश भी देखें तो- एक प्रदूषण के लिए, दो गंभीर प्रदूषण की छूट दे दी? एक कानून के लिए, दो कानून कुएं में झोंक दिए? एक आदेश पालन के लिए दो आदेश नदी में बहा दिए? इसलिए आसान हो गया लिखना-बताना कि अगर वायु गुणवत्ता आयोग की आधी अधूरी रिपोर्ट, बिना प्लानिंग, बिना स्टडी, बिना सुझाव की रिपोर्ट, पर यूं ही फैसले होते रहे तो- आबादी तबाह होते देखने के सिवा कुछ नहीं मिलेगा? प्रदूषण बढ़ता रहेगा? आबादी तबाह होती रहेगी? कानून की अहमियत खत्म होती रहेगी रहेंगी? सुप्रीम कोर्ट उसकी सुनवाई का दुरुपयोग के सिवा, कोई फायदा नहीं होगा? प्रदूषण कभी कम नहीं होगा? अब देखते हैं- आयोग की रिपोर्ट में क्या गलतियां? क्या तबाही? शुद्ध नियत मजबूत नीति पर विचार नहीं किया? 62 लाख वाहन कबाड़ियों को लुटवाकर दूसरे प्रदूषण को छूट दे दी? डिपेंडेंट संस्था ने अपनी अधूरी, बिना प्लानिंग, बिना स्टडी, बिना सुझाव की रिपोर्ट एडमिट करा दी, उसी पर एक तरफा जल्दबाजी में फैसला करा दिया? जो नहीं होना चाहिए! अब वाहन तो लुट गए सड़क पर चलना बंद हो गए? मगर 62 लाख पुराने वाहन का हजारों टन ई-वेस्ट, 62 लाख बैटरीयां, कुएं में झोंक दी? ई-वेस्ट, और बैटरी प्रदूषण को छूट देकर, गंभीर कानूनी गलतियां की! नियमानुसार डिस्पोजल के लिए, कोई प्लानिंग, कोई स्टडी, कोई सुझाव, कोई नए- डिस्पोजल प्लांट, तैयार करने का इंतजार नहीं? कोई आदेश नहीं? नतीजा हजारों टन ई-वेस्ट, 62 लाख बैटरीयां, नियमानुसार प्लांट में डिस्पोजल के बजाय, कुएं में झोंक दिए? दसों लाख करोड़ के वाहन भी बर्बाद हो गए? प्रदूषण और बढ़ गया? उसके दांत और विषैले हो गए? जनता भी तबाह? बैटरी प्रदूषण, ई-वेस्ट कानून भी कुएं में? एक आदेश पालन के लिए दो आदेश नदी में बहा दिए? प्रदूषण के दांत और विषैले हो गए?