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एनजीटी के होते हुए प्रदूषण की सुनवाई में इंसाफ के सिवा सब मिलने लगा.!

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जहां देखो– खाओ जहर, पियो जहर, चिल्लाना मत, सुनेगा कोई नहीं,  जिंदगी का हिस्सा हो गया.!

देखो– इधर सुनवाई होती रही, उधर अफसरी ने पूरा कानपुर बर्बाद कर दिया! इंसानी खून में क्रोमियम मरकरी फ्लोराइड लेड, इतना ज्यादा कि भयभीत आबादी जिंदा मुर्दा में अंतर ही नहीं बता पा रही. 387 महिलाओं में 209 के खून में क्रोमियम मरकरी फ्लोराइड लेड मिले, हजार लोगों के खून में क्रोमियम, क्लोराइड, लेड, मरकरी मिले, भयभीत आबादी जिंदा है या मुर्दा अंतर ही नहीं बता पा रही, मगर एनजीटी के होते हुए, एनजीटी एक्ट, ऐतिहासिक आदेश, दोनों बिना दांत का शेर समझने लगी असंवैधानिक संस्थाएं? यह  कानून की सबसे बड़ी हार है! हमारे हिसाब से- एनजीटी को अपनी सुनवाई की अहमियत समझनी चाहिए, ऐतिहासिक आदेश की रक्षा के लिए, अध्यक्ष और सचिवों को कठोर दंड देकर, अपनी मौजूदगी का एहसास कराना चाहिए! तलब करके पूछना चाहिए- जेडएलडी कानून के होते हुए, ऑनलाइन एफ्लूएंट मॉनिटरिंग सिस्टम के होते हुए, 24 मईं 2019 और 26 सितंबर 2019 जैसे ऐतिहासिक आदेश होते हुए, जहरीली नदियां विषैले एक्यूफर छोड़ो इंसानी शरीर में, इंसानी खून में भी, क्रोमियम लेड मरकरी फ्लोराइड आर्सेनिक भर गए!

भला बताओ- इसे कानून की जीत कैसे कही जा सकती है! हमारे हिसाब से- एनजीटी को अपनी सुनवाई और प्रदूषण एजेंसियों के अपराध, उनके भ्रष्टाचार में अंतर समझना चाहिए! कानपुर में हाहाकार प्रदूषण की सुनवाई बेकार के नारे! 387 सैंपल में, 209 महिलाएं पीड़ित मिली! उनके खून में क्रोमियम मरकरी लेड बहुत ज्यादा मिले हैं! 11 इलाकों में 1हजार लोगों के खून में गंभीर रसायन जैसे- क्रोमियम, मरकरी, फ्लोराइड, लेड मिले!  मगर- सपा शासन से ज्यादा मक्कार योगी की, नौकरशाही बजट नहीं दे रही,  पूरे कानपुर को जहर पिलाने का सच छुपाने के लिए, पैसे ही नहीं दे रही? मुख्यमंत्री योगी को, यूपीपीसीबी यूपी ग्राउंडवाटर और जल निगम, तीनों को कठोर दंड देना चाहिए! तीनों मुखिया पर क्रिमिनल केस चलवाना चाहिए!