42 किमी. लंबा टिहरी बांध 37 गांव दबाए बैठा है। मित्रों..! 260 मीटर ऊंचे इस बांध की तलहटी 1125 मीटर चौड़ी है। जिसे बनाने में 125 गांव जख्मी हुए। दोस्तों, 575 मीटर लंबा विश्व का यह पांचवा सबसे ऊंचा और आठवां सबसे बड़ा बांध है। हालांकि, भारत का यह सबसे बड़ा बांध है जिसे बांधों का राजा भी कहा जाता है। हिमालय की दो प्रमुख नदियों पर बनाया गया, यह बांध भागीरथी और भिलांगना नदी पर है। इसीलिए इसका पानी सबसे स्वच्छ रहता है। हालांकि, यह बांध खतरनाक भूकंपित क्षेत्र में है। फिर भी इसकी बनावट में विशेष ध्यान रखा गया। यही कारण है कि यह आठ रेक्टल स्केल तक का भूकंप झेल सकता है। इसके पीछे अच्छाई यह है कि इसकी सुरक्षा तीन पहाड़ियां करती हैं। थले सागर, जिनौली और गंगोत्री की मोटी-मोटी दीवारों के चलते यह बिल्कुल सुरक्षित है। अगर यह नहीं होती, तो आधे यूपी और उत्तराखंड का काल तय था। दोस्तों, प्राकृतिक धरोहरों से इसको विशेष मदद मिली है। हालांकि इसके दुष्प्रभाव भी हैं। अगर यह टूट जाए तो आधा उत्तराखंड, आधा यूपी बह जाएगा। मगर इसकी अच्छाईयां भी हैं। पहले तो यह तीन राज्यों को बिजली देता है। दो राज्यों को सिंचाई का पानी देता है। अगर यह नहीं होता तो आधा यूपी, आधा उत्तराखंड हर साल बाढ़ में बहने से कोई नहीं रोक सकता था।









