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दुनिया का सबसे बड़ा गुरुद्वारा

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भारत का सबसे बड़ा गुरुद्वारा हर मंदिर साहिब जिसे ‘स्वर्ण मंदिर’ के नाम से जाना जाता है। पंजाब के अमृतसर शहर में स्थित है। यह सिख धर्म का सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है और पूरी दुनिया से लाखों श्रद्धालु यहां मत्था टेकने आते हैं। इस पवित्र स्थान की स्थापना सिखों के पांचवें गुरु “गुरु अर्जुन देव जी” ने 16वीं शताब्दी में करवाई थी। गुरुद्वारा एक विशाल और पवित्र सरोवर अमृत सरोवर के बीचों-बीच बना हुआ है। जिसकी शांति और सुंदरता लोगों को आध्यात्मिक सुकून प्रदान करती है। मंदिर का ऊपरी हिस्सा सोने से मढ़ा हुआ है। जिसे सिख साम्राज्य के शासक महाराजा रणजीत सिंह ने बनवाया था और इसी कारण इसे स्वर्ण मंदिर कहा जाने लगा। हर मंदिर साहिब की सबसे बड़ी विशेषता यहां चलने वाला लंगर है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा सामुदायिक रसोई घर माना जाता है। यहां प्रतिदिन हजारों, लाखों लोगों को बिना किसी भेदभाव के निशुल्क भोजन कराया जाता है। अमीर-गरीब किसी भी धर्म या जाति का व्यक्ति यहां एक ही पंक्ति में बैठकर भोजन करता है जो समानता और भाईचारे का अद्भुत संदेश देता है। गुरुद्वारे के चारों दिशाओं में खुले द्वार इस बात का प्रतीक हैं कि यह स्थान हर इंसान के लिए खुला है। यहां की गुरुवाणी, कीर्तन और शांत वातावरण मन को गहरी शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। रात के समय जब स्वर्ण मंदिर की रोशनी अमृत सरोवर के जल में प्रतिबिंबित होती है। तो उसका दृश्य अत्यंत मनमोहक और दिव्य प्रतीत होता है। हर मंदिर साहिब केवल धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि सेवा, समर्पण, त्याग और मानवता की सबसे बड़ी मिसाल है जो पूरे विश्व को एकता और प्रेम का संदेश देता है।