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छत्रपति की अनोखी निशानी सिंधु दुर्ग

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सिंधुदुर्ग एक ऐसा किला, जिसकी बनावट ही दुश्मन की बुरी हार है.! जैसा राजा, वैसा साहस, वैसी ही सूझबूझ, दोस्तों— हम बात कर रहे हैं छत्रपति शिवाजी की, और उनके खुद के बनवाए सिंधुदुर्ग किले की। बिल्कुल सही कहा 1664 में सिंधुदुर्ग किला बनवाया.! जिसे बनाने में पूरे 3 साल लगे, मतलब 1667 में सिंधुदुर्ग तैयार हुआ..! समुद्र के किसी भी हिस्से से किले का दरवाजा ना दिखाई दे, शिवाजी की यह पहली सूझबूझ थी, यही इस किले की पहली खूबसूरती है….! हालांकि किले में बाहरी एंट्रेंस, इतनी सकरी इतनी घुमावदार जिससे हाथी, सैनिक सभी थक जाएं, फिर भी ना एंट्री मिले, ना दरवाजा तोड़ पाए, मुख्य द्वार के ऊपर से गरम तेल की धार बहाने की ऐसी शानदार बनावट थी, जिससे दुश्मन, उसके सैनिक, उसके हाथी घोड़े, जल जाए, मर जाए या भाग जाए। मगर किले में घुसना तो दूर, भविष्य में हमला करना भूल जाएं..! मगर किले के अंदर से निकलने वाले शिवाजी के सैनिकों को तलवार घुमाने, शत्रु पर हमला करने का पूरा मौका मिले, सिंधु दुर्ग बनाने की यह सबसे अनोखी चतुराई थी।