भारत अपनी सभ्यता, संस्कृति और मंदिरों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। भारत का सबसे प्राचीन मंदिर जिसे मुंडेश्वरी देवी मंदिर कहा जाता है। जो बिहार के कैमूर जिले में एक पहाड़ी पर स्थित है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण लगभग 108 ईसवी के आसपास हुआ था और सबसे खास बात यह है कि यहां आज भी नियमित रूप से पूजा होती है। इसलिए इसे भारत का सबसे पुराना जीवित मंदिर माना जाता है। यह मंदिर लगभग 600 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। जहां तक पहुंचने के लिए सीढ़िया चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर की वास्तुकला भी बेहद अनोखी है क्योंकि यह अष्टकोणीय यानी आठ कोनों वाला मंदिर है जो भारत में बहुत कम देखने को मिलता है। मंदिर के अंदर देवी मुंडेश्वरी की मूर्ति स्थापित है जिन्हें माँ दुर्गा का रूप माना जाता है। साथ ही यहां भगवान शिव की भी पूजा होती है। इस मंदिर से जुड़ी एक खास मान्यता यह भी है कि कहा जाता है यहां पहले पशुबलि दी जाती थी। लेकिन समय के साथ परंपरा बदल गई और अब यहां बिना किसी हिंसा के पूजा की जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है। इसलिए दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं। पुरातत्व विभाग ने इस मंदिर को ऐतिहासिक धरोहर माना है और यहां से कई प्राचीन शिलालेख और मूर्तियां मिली हैं जो यह साबित करती हैं कि मंदिर हजारों साल पुराना है। यह स्थान इतिहास, आस्था और वास्तुकला का अद्भुत संगम माना जाता है। इस तरह मुंडेश्वरी देवी मंदिर ना केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि भारत के प्राचीन इतिहास को समझने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण स्थल है जो आज भी हमारी पुरानी सभ्यता की कहानी सुनाता है।









