Home अन्य समाचार UGC बवाल बन गया

UGC बवाल बन गया

124

UGC नियम गले की हड्डी बन गया पूरे देश में गुस्सा है। शहर-शहर बवाल होने लगा, अफसर इस्तीफा देने लगे, छात्रों ने काॅलेज छोड़, सड़कों पर डेरा डाल लिया। हाल ही में गवर्नमेंट और UGC ने उच्च शिक्षा से जुड़े कुछ नए नियम लागू किए हैं। जिनका मकसद काॅलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस में बराबरी, सुरक्षा और भेदभाव खत्म करना बताया जा रहा है। इन नियमों के तहत हर शिक्षण संस्थान में Equal Opportunity Centre, Equal Committee और शिकायत निवारण सिस्टम बनाना अनिवार्य किया गया है। ताकि किसी भी छात्र या शिक्षक के साथ जाति, वर्ग, जेंडर या किसी और आधार पर भेदभाव न हो। UGC का कहना है कि इन नियमों से कमजोर और वंचित वर्ग के छात्रों को सुरक्षा मिलेगी, कैंपस का माहौल बेहतर होगा और पढ़ाई के दौरान किसी भी तरह की प्रताड़ना को रोका जा सकेगा। इसके साथ-साथ ट्रेनिंग और अवेयरनेस प्रोग्राम्स के जरिए शिक्षकों और स्टाफ को भी संवेदनशील बनाया जाएगा। जिससे शिक्षा व्यवस्था ज्यादा इंसाफपूर्ण बने, लेकिन इन्हीं निमयों को लेकर देशभर में विवाद भी खड़ा हो गया है। खासकर जनरल कैटेगरी के छात्रों और कुछ संगठनों का कहना है कि नए नियमों में उनका जिक्र साफ तौर पर नहीं किया गया है। आरोप है कि नियम एक तरफा हैं, और शिकायत की परिभाषा इतनी व्यापक है कि इसका गलत इस्तेमाल भी हो सकता है। कई लोगों को डर है कि इससे कैंपस में तनाव, डर और फर्जी शिकायतों का माहौल बन सकता है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर छात्र प्रदर्शन, राजनीतिक, बयानबाजी और कानूनी बहस तक शुरू हो गई है। मामला अब सिर्फ शिक्षा सुधार का नहीं, बल्कि बराबरी बनाम पक्षपात की बहस बन चुका है। अब देखना ये होगा कि सरकार और UGC इन आपत्तियों पर क्या बदलाव या स्पष्टीकरण देते हैं, क्योंकि शिक्षा का असर सिर्फ आज पर नहीं बल्कि देश के भविष्य पर पड़ता है।