water – Rashtriya Samasya https://rashtriyasamasya.com Rashtriya Samasya Sat, 03 May 2025 09:54:05 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://rashtriyasamasya.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-rastriya-32x32.png water – Rashtriya Samasya https://rashtriyasamasya.com 32 32 एनजीटी को अपनी पावर और प्राकृतिक संपदाओं पर गम्भीर होना चाहिए https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%8f%e0%a4%a8%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b0-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%8f%e0%a4%a8%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b0-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0/#respond Sat, 03 May 2025 09:54:03 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=9454 समस्या टीम
एनजीटी को अपनी पावर, और अपनी प्राकृतिक संपदाओं पर गम्भीर होना चाहिए…! पवित्र संस्था को उसकी आलोचनाओं से बचाने के लिए, जज को अपनी सुनवाई अपने आदेश दोनों का रूप बदलना चाहिए…! उनके आदेश में उनके जजमेंट में इंसाफ होना चाहिए…! इनलीगल को लीगल कर दिखाने वाले अफसर जिला के हों, राज्य या केन्द्र के हों, दंड देना ही चाहिए।

ऐसा कई केसों में देखा गया जब एनजीटी में सुनवाई होती रहती है, अफसर अधूरी-असत्य रिपोर्ट देकर, मनचाहे आदेश ले जाते हैं…! कभी इंपैक्ट शुल्क लेकर अवैध को वैध दिखाया जाता है, कभी उनसे दोस्ती करके अवैध को वैध दिखाया जाता है, यहां तक कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसर भी अपराध करने से नहीं बचते, पहले उन्हें कई तरह से दोषी दिखाते, फिर उन्हें बचाने के लिए, या अपने किए आदेश खुद ही मिटा लेते हैं, या एनजीटी में झूठी अधूरी रिपोर्ट देकर मनचाहे आदेश लेकर बचा लेते हैं…! अमीरों की दोषी फैक्ट्रियां बचाने के लिए कानूनी कागज लिखे जाते हैं…। दोषी जिला और राज्य हों, उनके अफसर हों, केन्द्रीय प्रदूषण या केन्द्रीय भूजल बोर्ड के हों, उन्हें बचाने का चलन उपलब्धी समझा जा रहा, ओ0ए0 नं0. 710/2017 और 176/2015 आदि मजबूत प्रमाण हैं।

राष्ट्रीय समस्या ने जब कुछ विशेषज्ञों से, कुछ अधिवक्ताओं से, कुछ पर्यावरण के जानकारों से और कुछ जनता से पूछना चाहा, एनजीटी की पावर, पर्यावरण के नौ कानून, और प्राकृतिक संपदाओं के हालात पर सवाल किये…? तो 80 फीसदी लोगों ने एनजीटी की तीखी आलोचना की, असफलता और एनजीटी की आलोचनाओं के लिए भी सिर्फ जज को जिम्मेदार बताया…! कई लोगों ने अफसरों की आमदनी का जरिया बताया, कुछ अधिवक्ताओं ने साफ कहा एनजीटी को अपनी पावर इस्तमाल करनी चाहिए…! अपने पुराने आदेश, पुरानी गाइडलाइन का कम्पलाइंस करना चाहिए…! कुछ ने कहा, जब एनजीटी खुद अपने आदेश, अपनी गाइडलाइन की रक्षा नहीं करेगी, तो अफसर से उम्मीद कैसे की जा सकती है…! क्योंकि आदेश और गाइडलाइन तो अफसर की असफलता की वजह से ही हुए हैं, कुछ ने कहा, एनजीटी की ड्यूटी है नदी की रक्षा करना, पीने वाली नदी दिखाना, एनजीटी की जिम्मेदारी बननी चाहिए, शुद्ध सांस, शुद्ध प्यास दिलाना, एनजीटी को अपनी ड्यूटी समझनी चाहिए, अन्यथा एनजीटी बनाने के मकसद बच पाना संभव नहीं होगा…! कुछ लोगों ने कहा एनजीटी प्रदूषण का कुछ नहीं कर पाएगी…! कुछ ने कहा, एनजीटी बहुत कुछ कर सकती है, पाताल से आसमान तक बदलाव करने की ताकत रखती है, मगर भूखी अफसरी, भूखे नेता, भूख मंत्रालय कुछ नहीं करने देंगे। कुछ लोगों ने कहा इसके लिए सुप्रीम कोर्ट को गम्भीर होना चाहिए, सांस-प्यास के मसले पर सुप्रीम कोर्ट को गम्भीरता से सुनवाई करनी चाहिए, संस्थाओं को असफल करने वाले अफसर को दंडित करना चाहिए…!

देश की कोई प्राकृतिक संपदा सुरक्षित नहीं बची, फिर भी किसी को सजा नहीं हुई, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट को अपनी निचली अदालतें हों, अपनी बनाई हुई संस्थाएं हों, उनकी सफलता-असफलता पर, गम्भीरता से विचार करना चाहिए…!

सूखी नदियां, प्यासे गांव, देश-दिल्ली की पहचान बनते जा रहे…! यह लोकतंत्र की जीत नहीं, हार है…? आजाद देश में गुलामी का कब्जा है।

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नई सरकार की पहली पहल https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%a8%e0%a4%88-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%a8%e0%a4%88-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2/#respond Sun, 20 Apr 2025 16:31:36 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=9414 राष्ट्रीय समस्या।
दिल्ली को मिले 1111 टैंकर!
पानी माफिया खत्म के लिए मजबूत प्रयास!
ना बजेगी बाल्टी-केन, ना होगी सिर फुडव्वल!
दिल्ली की प्यास सुप्रीम कोर्ट गई, बेईमान वहां भी छेद कर दिये!
प्यासी दिल्ली देख विदेशी हँसते थे, अब नहीं हंसेंगे!
जीपीएस वाले सभी 1111 टैंकर अब वहीं पानी देंगे, जहां प्यास बिलखती रही है!
दोस्तो! प्यासी दिल्ली, उतराती दिल्ली, हांफती दिल्ली, बसाती दिल्ली, रेंगती दिल्ली, ये वो समस्यायें हैं, जो दिल्ली की पहचान बन चुकी थी, जिनमें से एक पहल आज मजबूती से सामने आई और सही समय पर आई, ये परवेश वर्मा, रेखा गुप्ता दोनों के लिए जीत की शुरुआत है।

गर्मियों के मौसम में दिल्ली में पानी की सप्लाई बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को 1111 नए पानी के टैंकरों को हरी झंडी दिखाई। पानी की चोरी और कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए इन पानी के टैंकरों में लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम लगा हुआ है। कमांड सेंटर से टेक्नोलाजी का इस्तेमाल कर ट्रैंकरों पर नजर रखी जा सकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, दिल्ली में नई सरकार के दो महीने पूरे हो गए। हमने एक महीने पहले यह तय किया था कि दिल्ली से टैंकर माफिया को खत्म करना है। दिल्ली में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए एक पारदर्शी सिस्टम को लागू करना है। एक सुगम, पारदर्शी व्यवस्था को किस तरह से लेकर आया जाए।

उन्होंने कहा कि जब अधिकारियों के साथ चर्चा हुई, तो तय किया गया कि प्रत्येक टैंकर में जीपीएस होना चाहिए। उसका एक कमांड सेंटर होना चाहिए। हर एक सेंटर से पूरी निगरानी रखी जाएगी, किसके लिए पानी भेजा जा रहा है। उस व्यक्ति, स्थान पर पानी पहुंच रहा है या नहीं।

सीएम ने कहा कि यह पारदर्शिता और इमानदारी की जो नीति है, वह हमारे केंद्र की सरकार की है। न पानी की लीकेज और ना हीं भ्रष्टाचार की कोई लीकेज रहेगी। दिल्लीवालों के दुख के 27 वर्ष का वनवास अब धीरे-धीरे खत्म होने वाला है। आगे रेखा ने कहा कि पानी की किल्लत को दूर करने के लिए टैंकर ही आखिरी समाधान नहीं है। आगे बड़े स्तर पर काम जारी है।

पिछली सरकार में मिलकर काम करने की नहीं थी मंशा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि एक वो मंच होते थे जहां मिलकर काम करने की कोई मंशा नहीं होती थी। जहां स्थानीय सांसद को साथ नहीं रखा जाता था। आज दिल्ली एक टीम के रूप में काम कर रही है। आज सभी का एक ही लक्ष्य है कि राजधानी विकसित दिल्ली में तब्दील हो। जिस दिन से सरकार बनी है, आज पूरी दो महीने हुए हैं। आज टीम के रूप में मिलकर निर्णय लिया जा रहा है।

सड़कों पर उतार दी 50 सुपर सकर मशीनें
रेखा गुप्ता ने कहा कि पिछली सरकार के राज में दो सुपर सकर मशीनें होती थी। अब मैने 50 सुपर सकर मशीनें दिल्ली की सड़कों पर उतार दी हैं। कहीं पर भी सीवर ओवरफ्लो की दिक्कत होती है तो तुरंत इसका समाधान मशीन के माध्यम से होगा। दिल्ली सरकार हर क्षेत्र के लिए काम कर रही है। सड़कों की साफ-सफाई, यमुना की सफाई, स्वास्थ्य, शिक्षा समेत तमाम क्षेत्र में काम कर रही है।

अब टैंकर ट्रैक किया जाएगा
मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि ये टैंकर पहले भी चलते थे। लेकिन अब टैंकर को ट्रैक भी किया जा सकेगा। पहले टैंकर माफिया शब्द चलता था। हमने दिल्ली जल बोर्ड आईटी डैशबोर्ड से जोड़ दिया है। दिल्ली गर्मी में पानी की मांग काफी बढ़ जाती है। 10 साल की आप-दा की सरकार और 10 हफ्ते की रेखा सरकार आज दिखा रही है क्या हो सकता है।

टैंकर का पानी वहीं जाएगा, जहां भेजा जाएगा
दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली में अब कौन सा टैंकर कहां पर होगा, ये दिल्ली का हर नागरिक देख सकता है। उसमें कितना पानी है इसे भी आनलाइन ट्रैक किया जा सकता है। टैंकर का पानी अब वहीं जाएगा जहां भेजा गया है। किसी माफिया के हाथों में बेचा नहीं जा सकता। ये एक ऐतिहासिक शुरुआत है।
दिल्ली की सरकार भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए टेक्नोलाजी का इस्तेमाल कर रही है। वहीं, मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली में कोई बुनियादी ढांचा नहीं है क्योंकि कुछ भी नहीं किया गया। हमें सब कुछ शून्य से शुरू करना होगा। इसमें समय लग सकता है, लेकिन हमारी सरकार युद्ध स्तर पर काम कर रही है। इस मौके पर सांसद मनोज तिवारी भी मौजूद रहें।

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