Kathmandu – Rashtriya Samasya https://rashtriyasamasya.com Rashtriya Samasya Mon, 03 Feb 2025 10:29:33 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://rashtriyasamasya.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-rastriya-32x32.png Kathmandu – Rashtriya Samasya https://rashtriyasamasya.com 32 32 विपक्षी सांसदों ने ओली सरकार के छह अध्यादेशों के खिलाफ संसद में पेश किये 50 से अधिक प्रस्ताव https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%93%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%b0/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%93%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%b0/#respond Mon, 03 Feb 2025 10:29:32 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=8766 काठमांडू, 03 फरवरी: प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कैबिनेट में लाए गए छह अलग-अलग अध्यादेशों के खिलाफ विपक्षी मोर्चा के सांसदों ने पचास से अधिक अस्वीकार प्रस्ताव संसद में पेश किये हैं। सरकार के इन अध्यादेशों पर मंगलवार से चर्चा और वोटिंग होनी है।

संसद सचिवालय के प्रवक्ता एकराम गिरी ने सोमवार को बताया कि सुशासन प्रवर्द्धन तथा सार्वजनिक सेवा प्रवाह संबंधी कानून के बदलाव लाने के लिए पेश किए गए अध्यादेश को वापस लेने की मांग करते हुए अलग-अलग दलों के 9 सांसदों हितराज पाण्डे, दुर्गा राई, शिशिर खनाल, भानुभक्त जोशी, ज्ञानु बस्नेत सुवेदी, रेखा शर्मा, प्रेम सुवाल, सुमना श्रेष्ठ और स्वर्णिम वाग्ले ने अस्वीकार प्रस्ताव पेश किये हैं। इसी तरह आर्थिक कार्यविधि तथा वित्तीय उत्तरदायित्व अध्यादेश अस्वीकृत करने के लिए 6 सांसदों ने अस्वीकार प्रस्ताव पेश किया है। इनमें स्वर्णिम वाग्ले, विराजभक्त श्रेष्ठ, वर्षमान पुन, छिरिङ डम्डुल लामा, प्रकाश ज्वाला, नारायणी शर्मा और प्रेम सुवाल हैं।

प्रवक्ता के मुताबिक निजीकरण कानून को संशोधन करने लिए जारी अध्यादेश कोअस्वीकार करने के लिए सात सांसदों ने अस्वीकार प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव को पेश करने वालों में माधव सापकोटा, उर्मिला माझी, सूर्यमान तामाङ दोङ, छिरिङ ल्हामु लामा, मेटमणी चौधरी, प्रेम सुवाल और सुमना श्रेष्ठ हैं।इसी तरह आर्थिक तथा व्यावसायिक वातावरण सुधार एवं निवेश अभिवृद्धि सम्बन्धी कानून के संशोधन के लिए लाए गए अध्यादेश को अस्वीकार करने का प्रस्ताव पेश करने वाले सांसदों में शक्ति बहादुर बस्नेत, महेन्द्र बहादुर शाही, रणेन्द्र बराली, भानुभक्त जोशी, नारायणी शर्मा और प्रेम सुवाल हैं।

दरअसल, बीते शुक्रवार को सरकार की तरफ से सभी 6 अध्यादेश प्रतिनिधि सभा से अनुमोदन करने के लिए पेश किये गए थे। इस पर मंगलवार से चर्चा और वोटिंग होनी है। हालांकि, सरकार के पास प्रतिनिधि सभा में स्पष्ट बहुमत ही नहीं, दो तिहाई सांसदों का समर्थन है, लेकिन राष्ट्रीय सभा में सरकार और विपक्षी दलों के सांसदों की संख्या लगभग बराबर है।

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नेपाल में हिन्दी को सरकारी कामकाज की भाषा बनाने वाला विधेयक विरोध के बाद वापस लिया https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0/#respond Sat, 25 Jan 2025 08:48:31 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=8233 काठमांडू, 25 जनवरी: नेपाल के मधेश प्रदेश में हिंदी को सरकारी कामकाज की भाषा बनाने वाला विधेयक कम्युनिष्ट दलों के विरोध के बाद वापस ले लिया गया है।

मधेश प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश सभा की बैठक में सरकारी कामकाज की भाषा में नेपाली, मैथिली, भोजपुरी के अलावा हिंदी भाषा को भी समावेश करने के लिए एक विधेयक पेश किया था। प्रदेश की संस्कृति मंत्री रानी शर्मा ने बुधवार को सदन पेश किया था।

सरकारी कामकाज की भाषा में हिंदी को समावेश किए जाने के विरोध में नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी एमाले, माओवादी, एकीकृत समाजवादी सहित अन्य दलों ने विरोध किया। सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल एमाले और विपक्ष में रहे माओवादी और एकीकृत समाजवादी के द्वारा दो दिनों तक सदन को अवरुद्ध रखा गया।

सत्तापक्ष के विधायकों का इस विधेयक का विरोध करने के बाद सरकार ने इसे वापस लेने का फैसला किया। प्रदेश के मुख्यमंत्री सतीश सिंह ने कहा कि सभी दलों की सहमति के बाद इसे दोबारा लाने पर विचार किया जाएगा।

शुक्रवार को प्रदेश की संस्कृति मंत्री रानी शर्मा ने सदन की बैठक में इस विधेयक को वापस लेने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा नेपाल की ही संपर्क भाषा है। और इस प्रदेश में शत प्रतिशत लोग हिंदी बोलते और समझते हैं इसलिए इसे सरकारी कामकाज की भाषा में समावेश करने का प्रस्ताव किया गया था लेकिन हिन्दी को लेकर वामपंथी दलों के विरोध के बाद इसे वापस लिया जा रहा है।

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