America – Rashtriya Samasya https://rashtriyasamasya.com Rashtriya Samasya Fri, 14 Feb 2025 07:14:34 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://rashtriyasamasya.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-rastriya-32x32.png America – Rashtriya Samasya https://rashtriyasamasya.com 32 32 भारत को अमेरिका देगा अत्याधुनिक एफ-35 लड़ाकू विमान https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/#respond Fri, 14 Feb 2025 07:14:32 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=8821 -वाशिंगटन डीसी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी घोषणा

वाशिंगटन, 14 फरवरी: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यहां हुई ऐतिहासिक मुलाकात के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में महत्वपूर्ण सामरिक घोषणा हुई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ संवाददाता सम्मेलन में यह ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत को अत्याधुनिक एफ-35 लड़ाकू विमान बेचने का फैसला किया है। इसका मकसद भारत को अत्याधुनिक स्टील्थ विमानों वाले देशों के विशिष्ट क्लब में शामिल करना है।

प्रधानमंत्री मोदी से बेहद सौहार्दपूर्ण मुलाकात के बाद हुए संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस साल अमेरिका भारत में सैन्य बिक्री को कई अरब डॉलर तक पहुंचाएगा। हमने भारत को एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान देने का रास्ता खोल दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत में अमेरिका तेजी के साथ सैन्य व्यापार बढ़ाएगा। महत्वपूर्ण यह है कि डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में पुनः वापसी के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह पहला दौरा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें खुशी इस बात की है कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च स्थान पर रखते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप की तरह वह भी अपने देश के हितों को सबसे ऊपर रखते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आपको (डोनाल्ड ट्रंप) व्हाइट हाउस में वापस देखकर खुशी हो रही है। वह भारत के 140 करोड़ लोगों की ओर से उन्हें बधाई दे रहे हैं। भारत के लोगों ने मुझे तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में काम करने का मौका दिया है। इस कार्यकाल में वह अगले चार वर्ष तक आपके साथ मिलकर काम करेंगे। भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आपके पहले कार्यकाल के दौरान हमारे संबंध प्रगाढ़ रहे। अब हम उसी बंधन, समान विश्वास और समान उत्साह के साथ और तेजी से आगे बढ़ेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स हैंडल पर लिखा, ”राष्ट्रपति ट्रंप अकसर MAGA के बारे में बात करते हैं। भारत में, हम एक विकसित भारत की दिशा में काम कर रहे हैं। उसका अमेरिकी संदर्भ में अनुवाद MIGA है। और साथ में भारत-अमेरिका के बीच समृद्धि के लिए मेगा साझेदारी है।” इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य पोस्ट में ट्रंप के भरोसेमंद साथी एलन मस्क से हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा, ” वाशिंगटन डीसी में हमने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की, जिनमें अंतरिक्ष, गतिशीलता, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। मैंने सुधार और ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ को आगे बढ़ाने की दिशा में भारत के प्रयासों के बारे में बात की।”

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अमेरिका में एफबीआई के 24 से ज्यादा अधिकारी बर्खास्त https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%8f%e0%a4%ab%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%95%e0%a5%87-24-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%8f%e0%a4%ab%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%95%e0%a5%87-24-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c/#respond Sat, 01 Feb 2025 07:50:27 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=8666 वाशिंगटन, 01 फरवरी: संयुक्त राज्य अमेरिका में फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) के छह सबसे वरिष्ठ अधिकारियों और देशभर के एफबीआई फील्ड कार्यालयों के कई प्रमुखों को बाहर कर दिया गया है। ऐसे अधिकारियों की कुल संख्या 24 से अधिक बताई गई है। इनमें कई अधिकारी ऐसे हैं जिन्होंने छह जनवरी के कैपिटल दंगों की जांच की थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरा कार्यकाल शुरू करते ही एफबीआई अधिकारियों के खिलाफ शुरू की गई यह सबसे बड़ी कार्रवाई है। एफबीआई संयुक्त राज्य अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस की सबसे महत्वपूर्ण एजेंसी है।

एनबीसी न्यूज की खबर के अनुसार, नौकरी से बर्खास्त किए गए इन अधिकारियों को एक पत्र भी भेजा गया गया है। इसमें कहा गया है कि छह जनवरी के दंगों के अभियोजन में उनकी भूमिका के लिए यह कार्रवाई की गई है। पत्र में ट्रंप के एक कार्यकारी आदेश का हवाला भी दिया गया है। इसमें छह जनवरी के अभियोजन को गंभीर राष्ट्रीय अन्याय बताया गया है। साथ ही कहा गया है कि यह अन्याय पिछले चार वर्ष तक अमेरिकी लोगों पर किया गया।

ट्रंप प्रशासन के निशाने पर आए ब्यूरो के कार्यवाहक निदेशक ब्रायन जे. ड्रिस्कॉल ने शुक्रवार रात एफबीआई कार्यबल को भेजे पत्र में कहा है कि कुछ दिन पहले उनसे कार्यवाहक उप अटॉर्नी जनरल एमिल बोवे ने जांच में शामिल सभी एफबीआई कर्मचारियों की सूची मांगी थी। इन अधिकारियों की बर्खास्तगी एफबीआई निदेशक पद के लिए नामित काश पटेल की गवाही के एक दिन बाद की गई है। हालांकि शुक्रवार दोपहर एक पत्रकार के पूछने पर ट्रंप ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। मगर उन्होंने यह जरूर टिप्पणी की कि ब्यूरो में कुछ बहुत बुरे लोग हैं। उन्हें लगता है कि कुछ एफबीआई अधिकारियों को हटाने की जरूरत है।

एनबीसी न्यूज के अनुसार, एफबीआई के वाशिंगटन फील्ड कार्यालय के प्रभारी सहायक निदेशक डेविड सुंदरबर्ग को गुरुवार को ही सूचित कर दिया गया था कि वह नौकरी खोने जा रहे हैं और ब्यूरो छोड़ने की तैयारी कर लें। एफबीआई से बाहर किए गए आला अधिकारियों में रॉबर्ट वेल्स, रयान यंग, रॉबर्ट नॉर्डवाल, अर्लीन गेलॉर्ड, जैकी मैगुइरे और जे. विलियम रिवर हैं। इसके अलावा मियामी में प्रभारी विशेष एजेंट जेफरी वेल्ट्री को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। एफबीआई के लास वेगास फील्ड कार्यालय के प्रभारी विशेष एजेंट स्पेंसर इवांस पर भी ट्रंप प्रशासन की गाज गिरी है।

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नेपाल ने अमेरिका से आर्थिक मदद न रोकने का आग्रह किया https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%bf/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%bf/#respond Tue, 28 Jan 2025 08:55:57 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=8443 काठमांडू, 28 जनवरी: अमेरिका की सभी तरह की आर्थिक मदद रोकने की औपचारिक घोषणा ने नेपाल की चिंता बढ़ा दी है। नेपाल की सबसे बड़ी चिंता मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) के तहत मिल रहे आर्थिक सहयोग को लेकर है। नेपाल सरकार ने आधिकारिक रूप से पत्र लिख कर एमसीसी के तहत जारी 55 करोड़ अमेरिकी डॉलर का सहयोग नहीं रोकने के लिए आग्रह किया गया है।

यह पत्र सोमवार को नेपाल के वित्त मंत्रालय ने अमेरिकी राजदूतावास के माध्यम से एमसीसी मुख्यालय भेजा गया है। नेपाल के उप प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री विष्णु पौडेल का कहना है कि उन्हें पूरा भरोसा है कि अमेरिकी प्रशासन एमसीसी के सहयोग को नहीं रोकेगा। एमसीसी के तहत नेपाल में जो अंतर्देशीय प्रसारण लाइन का काम हो रहा है उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

पौडेल ने बताया कि उनके पास अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए बने यूएसएआईडी के तरफ से प्राप्त पत्र में आर्थिक सहयोग को तीन महीने के लिए रोकने की जानकारी दी गई है। पत्र में कहीं भी एमसीसी के तहत चल रहे परियोजना का जिक्र नहीं है। उन्होंने बताया कि एमसीसी एक अलग निकाय है। अमेरिकी कांग्रेस ने गरीब देशों में आर्थिक सहयोग के लिए इसे स्थापित किया है। नेपाल को आशंका है कि यूएसएआईडी की तरह एमसीसी की तरफ से ङी पत्र आ सकता है। इसलिए नेपाल ने पहले ही एमसीसी मुख्यालय को पत्र भेज दिया है।

वित्तमंत्री ने यह माना कि यूएसएआईडी के तरफ से आर्थिक सहयोग के रोकने से नेपाल के स्वास्थ्य क्षेत्र, शिक्षा क्षेत्र सहित कई अन्य महत्वपूर्ण परियोजना पर इसका असर पड़ सकता है। नेपाल सरकार वैकल्पिक उपायों पर विचार कर रही है।

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अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कोलंबिया पर कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%9f%e0%a5%8d/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%9f%e0%a5%8d/#respond Mon, 27 Jan 2025 10:26:14 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=8345 वाशिंगटन, 27 जनवरी: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कोलंबिया के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की। उन्होंने कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो के कोलंबियाई प्रवासियों को निर्वासित करने वाली अमेरिकी सैन्य उड़ानों के प्रवेश से इनकार करने के जवाब में यह कदम उठाए हैं। ट्रंप ने कोलंबिया से आयात पर कड़े नए टैरिफ और वीजा प्रतिबंधों की घोषणा की है।

यूएसए टुडे समाचार पत्र की खबर के अनुसार, कोलंबिया के राष्ट्रपित पेट्रो ने हथकड़ी लगे बंदियों की तस्वीरों की ओर इशारा करते हुए ट्रंप प्रशासन पर कोलंबियाई प्रवासियों के साथ “अपराधियों की तरह” व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनका देश अमेरिका से निर्वासन उड़ानों को तब तक स्वीकार नहीं करेगा जब तक कि प्रवासियों के साथ “उस सम्मान के साथ व्यवहार नहीं किया जाता जिसका एक इंसान हकदार है।”

दो प्रत्यावर्तन उड़ानों को कोलंबिया में उतरने की अनुमति नहीं मिलने के बारे में जानने के बाद ट्रंप ने कहा कि वह दक्षिण अमेरिकी देश से अमेरिका में आने वाले सभी सामानों पर तुरंत 25 फीसद टैरिफ लगा देंगे और एक सप्ताह के बाद इसे 50 प्रतिशत तक बढ़ा देंगे।

उन्होंने कोलंबिया के सरकारी अधिकारियों, उनके सहयोगियों और समर्थकों के तत्काल वीजा रद्द करने और अमेरिका में यात्रा प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। ट्रंप ने कोलंबिया को वित्तीय प्रतिबंध लगाने की भी चेतावनी दी। ट्रंप ने कहा कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर सभी कोलंबियाई नागरिकों और कार्गो के सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा निरीक्षण को बढ़ाएंगे। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, “ये उपाय सिर्फ शुरुआत हैं। हम कोलंबिया सरकार को उन अपराधियों की स्वीकृति और वापसी के संबंध में अपने कानूनी दायित्वों का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं देंगे।”

इस घोषणा पर पेट्रो ने कहा कि वह अमेरिका से निर्वासन का सामना करने वाले कोलंबियाई प्रवासियों की “सम्मानजनक वापसी” के लिए एक विमान प्रदान करेंगे। पेट्रो ने कहा कि उन्होंने अपने व्यापारमंत्री को अमेरिकी वस्तुओं पर कोलंबियाई टैरिफ को 25 प्रतिशत तक बढ़ाने का आदेश दिया।

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व्हाइट हाउस ने भारतीय-अमेरिकी पूर्व पत्रकार कुश देसाई को सौंपी अहम जिम्मेदारी  https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%b8-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%b8-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87/#respond Sat, 25 Jan 2025 08:52:25 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=8236 वाशिंगटन, 25 जनवरी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में व्हाइट हाउस ने भारतवंशियों पर अटूट भरोसा जताया है। व्हाइट हाउस की 24 जनवरी को की गई अहम घोषणा इसकी तसदीक करती है। व्हाइट हाउस ने भारतीय-अमेरिकी पूर्व पत्रकार कुश देसाई को उप प्रेस सचिव के पद पर नियुक्त करने की घोषणा की है।

देसाई इससे पहले रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन-2024 के लिए उप संचार निदेशक और आयोवा की रिपब्लिकन पार्टी के संचार निदेशक के रूप में काम कर चुके हैं। ट्रंप ने तीन भारवंशियों को बड़े पदों पर नियुक्त किया है। इसमें कुश देसाई के अलावा रिकी गिल और सौरभ शर्मा शामिल हैं। रिकी गिल को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और सौरभ को राष्ट्रपति कार्मिक कार्यालय में नियुक्ति मिली है। ट्रंप के अमेरिका के स्विंग स्टेट ऑफ यूएसए में क्लीन स्विप करने में कुश देसाई का बड़ा योगदान है।

भारतीय मूल के कुश देसाई ने रिपब्लिकन नेशनल कमेटी में डिप्टी बैटल ग्राउंड स्टेट्स और पेंसिल्वेनिया कम्युनिकेशंस डायरेक्टर के पद भी काम किया है। माना जाता है देसाई के बैटल ग्राउंड स्टेट्स में संदेश और नैरेटिव डेवलपमेंट ने ट्रंप की जीत में अहम भूमिका निभाई है। व्हाइट हाउस के संचार कार्यालय की देखरेख व्हाइट हाउस के उप चीफ ऑफ स्टाफ और कैबिनेट सचिव टेलर बुडोविच करेंगे। ट्रंप इससे पहले राष्ट्रपति के सहायक और व्हाइट हाउस संचार निदेशक स्टीवन चेउंग और राष्ट्रपति की सहायक और प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट की नियुक्ति का ऐलान कर चुके हैं।

बताया गया है कि रिकी गिल नई भूमिका में आने से पहले ट्रंप के पहले प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में रूस और यूरोपीय ऊर्जा सुरक्षा के निदेशक और विदेश विभाग में विदेशी भवन परिचालन ब्यूरो में सीनियर एडवाइजर के तौर पर काम कर चुके हैं। बेंगलुरु में जन्मे सौरभ शर्मा अमेरिकन मोमेंट के सह-संस्थापक और अध्यक्ष हैं।

ट्रंप की टीम में भारतवंशी

डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारतवंशियों को खास तवज्जो दी गई है। विवेक रामास्वामी को सरकारी दक्षता विभाग में एलन मस्क के साथ अहम जिम्मेदारी दी गई है। तुलसी गबार्ड को ट्रंप ने राष्ट्रीय खुफिया निदेशक की जिम्मेदारी दी है। वह हिंदू हैं लेकिन भारत से उनका कोई सीधा संबंध नहीं है। काश पटेल को एफबीआई निदेशक बनाया गया है। हरमीत के. ढिल्लो को सहायक अटार्नी जनरल (नागरिक अधिकारों के लिए) नियुक्त किया गया है। जय भट्टाचार्य को राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान का निदेशक बनाया गया है। कोलकाता में जन्मे जय ने कोरोना प्रतिबंधों पर कड़ा विरोध दर्ज किया था। श्रीरामकृष्णन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वरिष्ठ नीति सलाहकार बनाया गयाहै। श्रीरामकृष्णन भारतीय-अमेरिकी उद्यमी और लेखक हैं।

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अमेरिका के बाहर निकलने के बाद चीन ने डब्ल्यूएचओ के प्रति जताया दृढ़ समर्थन https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87/#respond Wed, 22 Jan 2025 11:04:02 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=7936 बीजिंग, 21 जनवरी: चीन ने मंगलवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रति अपना दृढ़ समर्थन व्यक्त किया है। चीन की ओर से यह अभिव्यक्ति अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन के निकाय से बाहर निकलने की घोषणा के बाद आई है।

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को अपने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद डब्ल्यूएचओ से अमेरिका को अलग करने की प्रक्रिया शुरू करने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। ट्रंप ने कोविड-19 संकट से ठीक से नहीं निपटने और सुधारों को पूरा करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए अमेरिका को विश्व स्वास्थ्य निकाय से अलग किया। पांच साल से भी कम समय में दूसरी बार अमेरिका ने विश्व निकाय से बाहर निकलने का आदेश दिया है।

ट्रम्प के इस कदम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मंगलवार को कहा कि चीन अपने कर्तव्यों को पूरा करने में विश्व स्वास्थ्य निकाय का समर्थन करना जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में, डब्ल्यूएचओ वैश्विक स्वास्थ्य प्रशासन में एक केंद्रीय समन्वय भूमिका निभाता है, और इसकी भूमिका को मजबूत किया जाना चाहिए, न कि कमजोर किया जाना चाहिए।

गुओ ने कहा कि चीन हमेशा की तरह अपने कर्तव्यों को पूरा करने में डब्ल्यूएचओ का समर्थन करेगा, अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य सहयोग को गहरा करेगा, वैश्विक स्वास्थ्य प्रशासन को मजबूत करेगा और सभी के लिए स्वास्थ्य के वैश्विक समुदाय के निर्माण को बढ़ावा देगा।

ट्रंप के फैसले से हटने पर WHO को खेद, पुनर्विचार की उम्मीद

दूसरी ओर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी से हटने की संयुक्त राज्य अमेरिका की घोषणा पर खेद व्यक्त किया और अमेरिकियों सहित दुनिया भर के लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की रक्षा में डब्ल्यूएचओ के महत्व पर जोर दिया है। साथ ही फैसले पर पुनर्विचार करनेकीउम्मीदजताई।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने एक्स पर बयान जारी कर कहा- “विश्व स्वास्थ्य संगठन को इस घोषणा पर खेद है कि संयुक्त राज्य अमेरिका संगठन से बाहर निकलने का इरादा रखता है। डब्ल्यूएचओ बीमारी के मूल कारणों को संबोधित करके, मजबूत निर्माण करके अमेरिकियों सहित दुनिया के लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वास्थ्य प्रणालियाँ, और बीमारी के प्रकोप सहित स्वास्थ्य आपात स्थितियों का पता लगाना, रोकना और प्रतिक्रिया करना, अक्सर खतरनाक स्थानों पर जहां अन्य लोग नहीं जा सकते।”

डॉटेड्रोस ने डब्ल्यूएचओ और अमेरिका के संबंधों को लेकर कहा कि “अमेरिका 1948 में डब्ल्यूएचओ का संस्थापक सदस्य था और तब से 193 अन्य सदस्य देशों के साथ, विश्व स्वास्थ्य सभा और कार्यकारी बोर्ड में अपनी सक्रिय भागीदारी सहित, संगठन के काम को आकार देने और संचालित करने में शामिल रहा है।”

बतादें कि डोनाल्ड ट्रम्प लंबे समय से डब्ल्यूएचओ के आलोचक रहे हैं और उन्होंने अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र निकाय से बाहर निकालने की मांग की थी। हालांकि उनके उत्तराधिकारी जो बाइडेन ने ट्रम्प के फैसले को पलट दिया था।

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बर्थराइट पॉलिसी बदलने के ट्रम्प के आदेश के खिलाफ अमेरिका के 22 राज्य, मुकदमा दायर https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%9f-%e0%a4%aa%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%9f-%e0%a4%aa%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95/#respond Wed, 22 Jan 2025 10:49:47 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=7928 वॉशिंगटन, 22 जनवरी: अमेरिका के 22 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बर्थराइट पॉलिसी बदलने के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। यह पॉलिसी अमेरिका में जन्मे बच्चों को उनके माता-पिता के इमिग्रेशन स्टेटस को नजरअंदाज कर नागरिकता की गारंटी देती है। डोनाल्ड ट्रम्प ने 20 जनवरी को शपथ ग्रहण के साथ जारी आदेश पर हस्ताक्षर किए जो अमेरिकी संविधान में बर्थराइट पॉलिसी को बदलने की बात करता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बर्थराइट पॉलिसी को लेकर दी गई मंजूरी कानूनी अड़चनों में फंसती दिख रही है। ट्रम्प ने देश की बर्थराइट पॉलिसी की यह कहते हुए आलोचना की थी कि यह नीति अवैध आव्रजन को प्रोत्साहित करती है। इसी वजह से दोबारा सत्ता में आते ही ट्रम्प ने इस नीति को बदलने संबंधी आदेश जारी कर दिए।

कौन-कौन से राज्य हैं खिलाफ

ट्रम्प के आदेश के साथ अमेरिका सहित दुनिया भर में हलचल मच गई। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक ट्रम्प के आदेश के खिलाफ कोलंबिया डिस्ट्रिक्ट और सैन फ्रांसिस्को के साथ 18 राज्यों ने फेडरल अदालत में मुकदमा कर दिया है। न्यू जर्सी और दो शहरों के साथ कैलिफोर्निया, मैसाचुसेट्स, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, हवाई, मेन, मैरीलैंड, मिशिगन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू मैक्सिको, न्यूयॉर्क, उत्तरी कैरोलिना, रोड आइलैंड, वर्मोंट और विस्कॉन्सिन भी ट्रम्प के आदेश के खिलाफ मुकदमे में शामिल हुए हैं। न्यू जर्सी के डेमोक्रेटिक अटॉर्नी जनरल मैट प्लैटकिन ने कहा कि राष्ट्रपतियों के पास व्यापक शक्तियां होती हैं लेकिन वे राजा नहीं होते।

कानूनी चुनौतियों का सामना करेंगेः व्हाइट हाउस

मुकदमा दायर होने के बाद व्हाइट हाउस की तरफ से कहा गया है कि वह अदालत में राज्यों का सामना करने के लिए तैयार है। इन मुकदमों को वामपंथी प्रतिरोध का विस्तार बताया।

अमेरिका की बर्थराइट पॉलिसी क्या है

1868 में किए गए अमेरिका के संविधान के 14वें संशोधन के मुताबिक, देश में पैदा हुए सभी बच्चों को जन्मजात नागरिकता दी जाती है। संशोधन का मकसद पूर्व में देश में गुलाम बनाए गए लोगों को नागरिकता और समान अधिकार देना था। संविधान के मुताबिक, अमेरिका में जिन बच्चों का जन्म हुआ, उनके अधिकार क्षेत्र के अधीन वो अमेरिका और जिस भी राज्य में पैदा हुए वहां के नागरिक बन जाते हैं। इस नीति के अंतर्गत विदेशी राजनयिकों के बच्चों को छोड़ कर अमेरिका में पैदा हुए लगभग सभी व्यक्तियों को शामिल किया गया है।

क्या है ट्रम्प का आदेशट्रम्प के आदेश में कहा गया है कि बर्थराइट पॉलिसी में गैर-दस्तावेजी अप्रवासियों के बच्चों को बाहर रखा जाना चाहिए और उन्हें जन्मजात नागरिकता नहीं दी जानी चाहिए। ट्रम्प का आदेश अमेरिका में जन्मे किसी भी बच्चे को 14वें संशोधन के तहत नागरिकता प्रदान करने को चुनौती देता है।

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अमेरिका में फिर आया ट्रंप युग https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%aa/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%aa/#respond Tue, 21 Jan 2025 06:33:41 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=7763 – 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली, फैसलों में राष्ट्र पहले की झलक

– पहली प्राथमिकता घुसपैठ रोकना, दूसरी महंगाई पर रोकथाम

– अपने पहले संबोधन में बोले, मेरी नीति ‘अमेरिका फर्स्ट’ की होगी

वाशिंगटन, 20 जनवरी: अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ग्रहण करने के अपने पहले संबोधन में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का स्वर्ण युग अब शुरू हुआ है। अमेरिका फर्स्ट की नीति के साथ वो फिर से देश को आगे लेकर जाएंगे। उन्होंने कहा कि वो सभी को साथ लेकर चलने को तत्पर हैं। साथ ही उन्होंने दक्षिणी सीमा पर नेशनल इमरजेंसी की भी घोषणा की।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने शपथ ग्रहण के बाद पहला बड़ा फैसला लेते हुए देश के दक्षिणी सीमा पर नेशनल इमरजेंसी की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाई जाएगी। संगठित अपराध के खिलाफ आज से ही काम शुरू होगा। उन्होंने कहा कि घुसपैठ रोकने के लिए जरूरत पड़ी तो वहां सेना को भी भेजा जाएगा। ट्रंप ने कहा कि अवैध प्रवासियों को वहीं छोड़कर आएंगे जहां से वो आए हैं।

अपनी सरकार की प्राथमिकता को बताते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता घुसपैठ को रोकना है ताकि देश की जनता सुरक्षित महसूस करे। दूसरी प्राथमिकता महंगाई पर रोक लगाना है ताकि लोगों को जरूरी सामानों के लिए अतिरिक्त बोझ न पड़े।

ट्रंप ने घोषित की ‘नेशनल एनर्जी इमरजेंसी’

ट्रंप ने कहा, ‘अत्यधिक खर्च और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई का संकट पैदा हुआ और इसीलिए आज मैं नेशनल एनर्जी इमरजेंसी की भी घोषणा करता हूं।’

लॉस एंजिल्स में आग की विभिषिका पर ट्रंप ने कहा, ‘हमारे पास एक पब्लिक हेल्थ सिस्टम है जो आपदा के समय काम नहीं करता है। फिर भी दुनिया के किसी भी देश की तुलना में इसपर अधिक पैसा खर्च किया जाता है। हम ऐसा नहीं होने दे सकते। हमारे पास एक ऐसी शिक्षा प्रणाली है जो हमारे बच्चों को कई मामलों में खुद पर शर्म करना और हमारे देश से नफरत करना सिखाती है। यह सब आज से ही बदल जाएगा।’

ट्रंप की चाह- दुनिया उन्हें शान्ति दूत के तौर पर जाने

ट्रंप ने कहा, मैं देशों को जोड़ने की कोशिश करूंगा। शांति स्थापित करना मेरी प्राथमिकता है। विरोधियों के खिलाफ बदले की कार्रवाई नहीं होगी। सैनिकों के अधिकार बढ़ाए जाएंगे। मैं युद्ध रोकने की कोशिश करूंगा। साथ ही उन्होंने कहा कि दूसरे देशों की जंग में अब अमेरिका की सेना नहीं जाएगी। उन्होंने कहा कि वो चाहते हैं कि दुनिया उन्हें शांति दूत के तौर पर जाने।

चीन को चुनौती

चीन को चुनौती देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पनामा कैनाल से चीन का आधिपत्य खत्म करेंगे। पनामा कैनाल को वापस लेंगे। वहीं भविष्य की बात करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका जल्द मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यात्री भेजेगा और दुनिया के सामने नई मिशाल पेश करेगा।

‘हमारी प्राथमिकता देश को गौरवान्वित, समृद्ध और स्वतंत्र बनाना’

अपने भाषण के शुरुआत में ट्रंप ने कहा, अमेरिका का स्वर्ण युग अब शुरू हुआ है। अमेरिका फर्स्ट की नीति के साथ वो फिर से देश को आगे लेकर जाएंगे। हम अपनी संप्रभुता बनाए रखेंगे। दुनिया हमारा इस्तेमाल नहीं कर सकेगी। अमेरिका में अब घुसपैठ नहीं होगा। उन्होंने कहा, ‘हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता एक ऐसा राष्ट्र बनाना होगा जो गौरवान्वित, समृद्ध और स्वतंत्र हो।’

दूसरे देशों पर टैक्स और टैरिफ बढ़ाएंगे

ट्रंप ने अमेरिका को संबोधित करते हुए कहा कि दूसरे देशों पर टैक्स और टैरिफ बढ़ाएंगे। हम देश की कानून व्यवस्था को पटरी पर लाएंगे। अमेरिका के लोगों को बोलने की स्वतंत्रता होगी। अमेरिका के दुश्मनों को हराकर रहेंगे। उन्होंने अमेरिका में ड्रग तस्करों को आतंकी घोषित करने का भी ऐलान किया। कहा सेना भी अपने मिशन के लिए आजाद रहेगी।

ट्रंप ने अमेरिका को लेकर अपनी नीतियों का भी खाका देश और दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि अमेरिका फिर से मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा। अमेरिका से तेल और गैस का निर्यात बढ़ेगा।

साथ ही पूर्ववर्ती सरकार को निशाने पर लेते हुए ट्रंप ने कहा कि बाइडेन ने समाज का ताना-बाना तोड़ा। वो ग्लोबल इंवेंट्स को हैंडल नहीं कर पाए। बाइडेन के राज में अपराधियों को शरण मिली और सीमाओं की सुरक्षा पर वो कुछ नहीं कर सके।

वहीं, अपने संघर्षों को याद करते हुए ट्रम्प ने कहा कि लोगों ने मुझे बदलाव के लिए चुना है। आठ साल से मुझे चैलेंज किया जा रहा था। मेरी हत्या करने की कोशिश की गई। अब अमेरिका में तेजी से बदलाव आएगा।

इससे पहले, डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में सोमवार रात शपथ ली। उनसे पहले पहले जेडी वेंस ने उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली। वाशिंगटन डीसी के यूएस कैपिटल बिल्डिंग में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने दोनों की शपथ दिलाई। वहीं, शपथ ग्रहण समारोह में फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग, अमेजॉन के फाउंडर जेफ बेजोस और एलन मस्क आदि कई दिग्गज शामिल रहे।

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अमेरिकी में चीन की कंपनी को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट से टिकटॉक पर प्रतिबंध को हां https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80/#respond Sat, 18 Jan 2025 10:09:02 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=7571 वाशिंगटन, 18 जनवरी, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने चीन के सोशल मीडिया ऐप टिकटॉक की विदाई का रास्ता साफ कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को बरकरार रखा। रविवार को कानून लागू होने पर इसे ऐप स्टोर से हटा दिया जाएगा। संयुक्त राज्य अमेरिका में टिकटॉक लोकप्रिय ऐप है। अमेरिका में 170 मिलियन से अधिक लोग इसका का प्रयोग करते हैं।

सीबीएस न्यूज चैनल के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने आमराय से यह फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने टिकटॉक के बाइडेन प्रशासन के प्रतिबंध कानून के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि प्रावधान किसी भी तरह के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करते। सुप्रीम कोर्ट ने टिकटॉक के खिलाफ निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।

व्हाइट हाउस ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कहा कि बाइडेन प्रशासन रविवार को प्रतिबंध लागू नहीं करेगा और इसे ट्रंप प्रशासन पर निर्णय लेने के लिए छोड़ देगा। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि वह टिकटॉक पर निर्णय लेने से पहले स्थिति की समीक्षा करेंगे। फैसले के बाद टिकटॉक ने कहा कि हाउस और न्याय विभाग यह स्पष्ट नहीं कर सके कि ऐप पर प्रतिबंध क्यों जरूरी है। वह भी तब, जब 170 मिलियन से अधिक अमेरिकी इसका प्रयोग करते हैं। दुर्भाग्य से टिकटॉक 19 जनवरी को अंधेरे में गुम हो जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ” प्रतिबंध के चुनौतीपूर्ण प्रावधान महत्वपूर्ण सरकारी हित को आगे बढ़ाते हैं। इनका अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से कोई लेना-देना नहीं है। अदालत ने कहा कि अब टिकटॉक या तो इसे बेच देगा या प्रतिबंध का सामना करेगा। चीन के इस ऐप के अमेरिकी उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच प्राप्त करने से रोकने के लिए ऐसा जरूरी है। कानून के अनुसार टिकटॉक को या तो अपनी मूल कंपनी बाइटडांस से अलग होना होगा या 19 जनवरी से अमेरिकी ऐप स्टोर और होस्टिंग सेवाओं से अलग होना होगा।

उल्लेखनीय है कि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अदालत से कानून के कार्यान्वयन को रोकने का आग्रह किया था। ट्रंप 20 जनवरी को दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेंगे। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने पर ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यह अपेक्षित था और सभी को इसका सम्मान करना चाहिए। सनद रहे सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में टिकटॉक को जीवन का अविभाज्य हिस्सा घोषित करने से भी इनकार कर दिया है।

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, बाइटडांस ने अमेरिका में इस लड़ाई को जनता के माध्यम से लड़ने की योजना बनाई है। टिकटॉक ऐप खोलने की कोशिश करने वालों को एक पॉप-अप संदेश के साथ स्वागत किया जाएगा। इसमें उन्हें नए कानून के बारे में जानकारी वाली एक वेबसाइट पर निर्देशित किया जाएगा। कई उपयोगकर्ताओं ने प्रतिबंध की प्रत्याशा में टिकटॉक से अपने वीडियो और डेटा को डाउनलोड करना शुरू कर दिया है। साथ ही चीन के स्वामित्व वाले रेडनोट सहित अन्य प्लेटफार्मों का उपयोग करना शुरू कर दिया है।व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव कैरिन जीन-पियरे ने कहा कि बाइडेन प्रशासन कानून को रविवार से लागू नहीं करेगा। वह इसे आने वाले ट्रंप प्रशासन पर छोड़ देगा। टिकटॉक के सीईओ शॉ च्यू ने एक वीडियो संदेश में कहा कि उन्हें डोनाल्ड ट्रंप पर भरोसा है। हम उनका समर्थन पाकर आभारी और प्रसन्न हैं। सॉलिसिटर जनरल एलिजाबेथ प्रीलोगर ने कहा कि टिकटॉक अब अमेरिकी ऐप स्टोर में उपलब्ध नहीं होगा। यदि टिकटॉक स्वेच्छा से बंद नहीं होता है, तो उसके भी विकल्प मौजूद हैं।

कब क्या हुआ

24 अप्रैल 2024: बाइडेन ने द्विदलीय टिकटॉक बिल पर हस्ताक्षर किए। इसमें चीन की मूल कंपनी बाइटडांस को अपनी नियंत्रण हिस्सेदारी बेचने या अमेरिका में अवरुद्ध होने के लिए छह महीने का समय दिया।

7 मई 2024: टिकटॉक ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उसने कहा कि यह स्वतंत्रता के अधिकारों पर असाधारण हमला है।

2 अगस्त 2024: अमेरिकी सरकार ने टिकटॉक के खिलाफ मुकदमा दायर किया। इसमें सोशल मीडिया कंपनी पर गैरकानूनी तरीके से बच्चों का डेटा एकत्र करने का आरोप लगाया।

6 दिसंबर 2024: एक संघीय अपील अदालत ने उस कानून को पलटने की टिकटॉक की कोशिश को खारिज कर दिया, जिसके तहत उसे 2025 की शुरुआत से अमेरिका में प्रतिबंधित या बेचा जाएगा।

27 दिसंबर 2024: नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से प्रतिबंध के अमल में विलंब करने का आग्रह किया।

10 जनवरी 2025: सुप्रीम कोर्ट के नौ न्यायाधीशों ने टिकटॉक और सामग्री निर्माताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों से सुना।

17 जनवरी 2025: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उस कानून को बरकरार रखा जिसके कारण राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के कारण टिकटॉक को कुछ ही दिनों में प्रतिबंधित किया जा सकता था।

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