rashtriyasamasya - Rashtriya Samasya https://rashtriyasamasya.com Rashtriya Samasya Tue, 25 Aug 2026 18:42:59 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://rashtriyasamasya.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-rastriya-32x32.png rashtriyasamasya - Rashtriya Samasya https://rashtriyasamasya.com 32 32 26.08.2026 – Delhi Edition https://rashtriyasamasya.com/26-08-2026-delhi-edition/ https://rashtriyasamasya.com/26-08-2026-delhi-edition/#respond Tue, 25 Aug 2026 18:42:58 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=10313 ]]> https://rashtriyasamasya.com/26-08-2026-delhi-edition/feed/ 0 डीसीपी ऑफिस: चाय से ज्यादा केतली गर्म https://rashtriyasamasya.com/dcp-office-%e0%a4%9a%e0%a4%af-%e0%a4%b8-%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%b2-%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%ae/ https://rashtriyasamasya.com/dcp-office-%e0%a4%9a%e0%a4%af-%e0%a4%b8-%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%b2-%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%ae/#respond Mon, 24 Aug 2026 17:04:29 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=10302
  • बहुत कठिन है डगर डीसीपी से मिलने की
  • मोबाइल और पेन तक करा लेते हैं जमा
  • पूर्वी दिल्ली। अगर आप जाते हैं कभी डीसीपी कार्यालय, मन में इच्छा है कि साहब से मिलकर अपनी पीड़ा सुनायें, तो यहां तक तो ठीक है। लेकिन अगर आप सोचते हैं कि साहब से मुलाकात हो जाएगी आसानी से, तो यहां आपने गलती कर दी। अगर कहें कि ऑफिस में साहब के मौजूद होने पर भी, कोई आपसे कह दे कि नहीं हैं साहब, तो चैकिएगा नहीं, क्योंकि यह तो अब बन चुकी है आम भाषा। यहां आने पर पहले तो होगी आपकी जांच, आपके पर्स की जांच, आपका मोबाइल हो जायेगा जमा, यहां तक कि आपकी जेब में लगा पेन भी रखवा लिया जायेगा बाहर। उसके बाद ही कहीं आपको मिलेगी हरी झंडी साहब के कमरे में घुसने की।

    कई चरणों से होगा गुजरना
    डीसीपी साहब से मिलना है आपको, तो पहला चरण है आपका इमारत के बाहर बैठा पहरेदार। सबसे पहले आप जी-हुजूरी करिये इन साहब की, पहले इनको बताईये कि कौन हो तुम? कहां घुसे जा रहे हो? इनको दिखाइये अपनी शिकायत, साथ में लगे कागजात, कहां कहां पहले कर चुके हो शिकायत? वहां से अब तक क्या क्या हुआ? अगर इन साहब को मुनासिब लगा कि आपको जाने दिया जाये अंदर, तो ही आप काबिल हैं, अन्यथा बाहर से ही करिये दर्शन इमारत के।
    अगर इस चरण में हो गये आप पास, तो अब खुद को तैयार करिये दूसरे चरण के लिए। ये साहब आपको मिलेंगे इमारत में ठीक घुसते ही, आपसे इशारे में पूछेंगे कि कहां? इनसे कहिये कि मुझे मिलना है डीसीपी साहब से, तब पता चलेगा आपको कि मिलने के लिए पहले बनवाना होगा पास, बताना होता है आपको अपना नाम, पता, मोबाइल नम्बर, काम और सिफारिश। काउंटर पर बैठी महिला कर्मी पहले तो लेंगे फोन पर इजाजत, फिर बनायेंगी आपका पास।
    पास बनने पर आप ये मत समझना कि अब हो जायेगी मुलाकात, अब कोई नहीं रोकेगे। क्योंकि इस चरण के बाद आयेगा आपका अंतिम चरण, पास लेकर आप जैसे ही जायेंगे साहब के कमरे की तरफ, तो वहां मिलेगा आपको एक अलग से कमरा, जिसमें फिर पूछा जायेगा आपसे नाम और काम। उनके मुंह से निकली पहली बात ‘‘साहब तो हैं नहीं या साहब निकलने वाले हैं’’ कर देगी आपके मन को ठंडा, क्योंकि आपकी अब तक की सारी मेहनत लगेगी आपको बेकार। अगर आपके दिन चल रहे होंगे अच्छे, तो ही ये आपसे मुखातिब होंगे सलीके से। लेकिन उसके बाद भी अब आपका मोबाइल होगा इनके पास जमा, आपका बैग रखवा लिया जायेगा बाहर, पर्स तो रही छोटी बात, आपकी जेब में लगा पेन भी इनको जायेगा आखों में खटक। जिसके बाद आप खुद को करेंगे एक मुजरिम जैसा महसूस, धिक्कार होगा आपको अपने खुद के फैसले पर, कोसने का मन करेगा खुद ही, आखिर क्या पड़ी थी इनसे मिलने की।
    लेकिन मुद्दा तो यह है कि आखिर क्यों होता है ऐसा? क्या दिक्कत हो सकती है साहब को अगर आप अपना पेन और मोबाइल लेकर जाते हैं उनके कमरे में। जबकि ऐसा भी नहीं है कि यह सब महसूस करने वाले आप पहले होंगे, क्योंकि पहले भी उच्च न्यायालय से लेकर उच्चतम न्यायालय तक दे चुके हैं कई बार फैसला ऐसे ही मुद्दों पर। मगर जो एक बार में मान जाये, वो पुलिस कैसी।

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    यह कैसा वायु गुणवत्ता आयोग? https://rashtriyasamasya.com/what-kind-of-air-quality-commission-is-this/ https://rashtriyasamasya.com/what-kind-of-air-quality-commission-is-this/#respond Mon, 24 Aug 2026 10:18:46 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=10297 जिसमें नीति नहीं, स्टडी और प्लानिंग के अफसर नहीं,
    शुद्ध हवा के कोई ठोस प्रयास नहीं, हवा के दोषियों को सजा नहीं

    • बिना नीति का आयोग?
    • प्लानिंग-स्टडी विहीन अफसर?
    • तभी तो- 62 लाख पुराने वाहनों की 62 लाख बैटरीयां, और बैटरी वेस्ट कानून, दोनों कुएं में झोंक दिए?
    • हजारों टन ई-वेस्ट और ई-वेस्ट कानून, दोनों नदी में बहा दिए?
    • आबादी भी तबाह करा दी? प्रदूषण भी बढ़ गया? और
    • हवा के गुनहगार भी बचा दिए?

    ( निशांत सिंह )
    आयोग को शुद्ध नियत, मजबूत नीति से चलना चाहिए!
    सुप्रीम कोर्ट को भी जन तबाही के फैसलों से बचाना चाहिए?
    अधूरी रिपोर्ट, बिना प्लानिंग, बिना स्टडी, बिना सुझाव की रिपोर्ट, सुप्रीम सुनवाई में नहीं देनी चाहिए! अब देखो- 62 लाख वाहन मतलब आबादी भी तबाह? और प्रदूषण भी बढ़ गया? अगर नियम और आदेश भी देखें तो- एक प्रदूषण के लिए, दो गंभीर प्रदूषण की छूट दे दी? एक कानून के लिए, दो कानून कुएं में झोंक दिए? एक आदेश पालन के लिए दो आदेश नदी में बहा दिए? इसलिए आसान हो गया लिखना-बताना कि अगर वायु गुणवत्ता आयोग की आधी अधूरी रिपोर्ट, बिना प्लानिंग, बिना स्टडी, बिना सुझाव की रिपोर्ट, पर यूं ही फैसले होते रहे तो- आबादी तबाह होते देखने के सिवा कुछ नहीं मिलेगा? प्रदूषण बढ़ता रहेगा? आबादी तबाह होती रहेगी? कानून की अहमियत खत्म होती रहेगी रहेंगी? सुप्रीम कोर्ट उसकी सुनवाई का दुरुपयोग के सिवा, कोई फायदा नहीं होगा? प्रदूषण कभी कम नहीं होगा? अब देखते हैं- आयोग की रिपोर्ट में क्या गलतियां? क्या तबाही? शुद्ध नियत मजबूत नीति पर विचार नहीं किया? 62 लाख वाहन कबाड़ियों को लुटवाकर दूसरे प्रदूषण को छूट दे दी? डिपेंडेंट संस्था ने अपनी अधूरी, बिना प्लानिंग, बिना स्टडी, बिना सुझाव की रिपोर्ट एडमिट करा दी, उसी पर एक तरफा जल्दबाजी में फैसला करा दिया? जो नहीं होना चाहिए! अब वाहन तो लुट गए सड़क पर चलना बंद हो गए? मगर 62 लाख पुराने वाहन का हजारों टन ई-वेस्ट, 62 लाख बैटरीयां, कुएं में झोंक दी? ई-वेस्ट, और बैटरी प्रदूषण को छूट देकर, गंभीर कानूनी गलतियां की! नियमानुसार डिस्पोजल के लिए, कोई प्लानिंग, कोई स्टडी, कोई सुझाव, कोई नए- डिस्पोजल प्लांट, तैयार करने का इंतजार नहीं? कोई आदेश नहीं? नतीजा हजारों टन ई-वेस्ट, 62 लाख बैटरीयां, नियमानुसार प्लांट में डिस्पोजल के बजाय, कुएं में झोंक दिए? दसों लाख करोड़ के वाहन भी बर्बाद हो गए? प्रदूषण और बढ़ गया? उसके दांत और विषैले हो गए? जनता भी तबाह? बैटरी प्रदूषण, ई-वेस्ट कानून भी कुएं में? एक आदेश पालन के लिए दो आदेश नदी में बहा दिए? प्रदूषण के दांत और विषैले हो गए?

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    22.08.2026 https://rashtriyasamasya.com/22-08-2026/ https://rashtriyasamasya.com/22-08-2026/#respond Sat, 22 Aug 2026 18:43:14 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=10293 ]]> https://rashtriyasamasya.com/22-08-2026/feed/ 0 “आरंभ” – दिल्ली सरकारी विद्यालयों के पूर्व छात्रों का प्रथम भव्य एलुमनाई मिलन समारोह संपन्न https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%ad-%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%a6%e0%a4%af%e0%a4%b2%e0%a4%af-%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%b5-%e0%a4%9b%e0%a4%a4/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%ad-%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%a6%e0%a4%af%e0%a4%b2%e0%a4%af-%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%b5-%e0%a4%9b%e0%a4%a4/#respond Tue, 02 Jun 2026 12:35:26 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=10282 नई दिल्ली: दिल्ली सरकारी विद्यालयों के पूर्व छात्रों के लिए आयोजित प्रथम एलुमनाई मिलन समारोह “आरंभ” का भव्य आयोजन 31 मई 2026 को गवर्नमेंट बॉयज़ सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जीटीबी नगर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर दिल्ली के विभिन्न सरकारी विद्यालयों से जुड़े 150 से अधिक पूर्व छात्र-छात्राओं ने भाग लिया, जिनमें 1970 के दशक से लेकर वर्ष 2025 तक के विभिन्न बैचों के प्रतिनिधि शामिल रहे।

    यह आयोजन विभिन्न पीढ़ियों के पूर्व छात्रों को एक मंच पर लाने, आपसी संबंधों को सुदृढ़ बनाने तथा समाजहित में सामूहिक योगदान की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व छात्रों ने अपने विद्यालयी जीवन की यादों को ताज़ा किया तथा अपने अनुभवों और जीवन-यात्रा की प्रेरणादायक कहानियाँ साझा कीं।

    कार्यक्रम के विशेष आकर्षण रहे प्रसिद्ध जादूगर जादूगर सम्राट शंकर, जिन्होंने अपने अद्भुत जादुई प्रदर्शनों से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके रोमांचक और मनोरंजक जादू शो ने पूरे वातावरण को उत्साह, आश्चर्य और आनंद से भर दिया।

    इस अवसर पर अतुल त्रिपाठी ने एलुमनाई एसोसिएशन की भावी योजनाओं और दृष्टिकोण को साझा किया। उन्होंने बताया कि यह मंच पहले ही स्वास्थ्य सेवाओं, काउंसलिंग, सरकारी एवं निजी प्रशासनिक सहायता सहित विभिन्न क्षेत्रों में एक-दूसरे की मदद करने का कार्य प्रारंभ कर चुका है। साथ ही, एसोसिएशन वर्तमान में सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों तक पहुँचकर विभिन्न उपयोगी विषयों पर निःशुल्क सत्र एवं मार्गदर्शन कार्यक्रम भी आयोजित कर रही है।

    कार्यक्रम को अनेक विचारोत्तेजक एवं हास्यरस से भरपूर कविताओं, गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने और भी जीवंत बना दिया। इन प्रस्तुतियों ने उपस्थित सभी लोगों का भरपूर मनोरंजन किया तथा कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

    सामाजिक सरोकारों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम स्थल पर प्रतिभागियों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसका लाभ बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने उठाया।

    समारोह के दौरान अतिथियों, विशिष्ट व्यक्तियों तथा आयोजन को सफल बनाने वाले समर्पित आयोजकों को उनके योगदान के लिए स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

    सभी प्रतिभागियों ने इस अभिनव पहल की मुक्तकंठ से सराहना की। “आरंभ” ने न केवल पुराने साथियों को पुनः जोड़ने का कार्य किया, बल्कि एक ऐसे सशक्त मंच की नींव भी रखी, जो भविष्य में पूर्व छात्रों के सहयोग, समाज सेवा और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु निरंतर कार्य करता रहेगा।

    उत्साह, अपनत्व, स्मृतियों और सामाजिक प्रतिबद्धता से परिपूर्ण यह आयोजन सभी प्रतिभागियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया तथा दिल्ली सरकारी विद्यालयों के एलुमनाई आंदोलन के एक नए अध्याय की सफल शुरुआत का साक्षी बना।

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    एनजीटी के होते हुए प्रदूषण की सुनवाई में इंसाफ के सिवा सब मिलने लगा.! https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%8f%e0%a4%a8%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b7/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%8f%e0%a4%a8%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b7/#respond Sat, 28 Mar 2026 12:27:18 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=10270 जहां देखो– खाओ जहर, पियो जहर, चिल्लाना मत, सुनेगा कोई नहीं,  जिंदगी का हिस्सा हो गया.!

    देखो– इधर सुनवाई होती रही, उधर अफसरी ने पूरा कानपुर बर्बाद कर दिया! इंसानी खून में क्रोमियम मरकरी फ्लोराइड लेड, इतना ज्यादा कि भयभीत आबादी जिंदा मुर्दा में अंतर ही नहीं बता पा रही. 387 महिलाओं में 209 के खून में क्रोमियम मरकरी फ्लोराइड लेड मिले, हजार लोगों के खून में क्रोमियम, क्लोराइड, लेड, मरकरी मिले, भयभीत आबादी जिंदा है या मुर्दा अंतर ही नहीं बता पा रही, मगर एनजीटी के होते हुए, एनजीटी एक्ट, ऐतिहासिक आदेश, दोनों बिना दांत का शेर समझने लगी असंवैधानिक संस्थाएं? यह  कानून की सबसे बड़ी हार है! हमारे हिसाब से- एनजीटी को अपनी सुनवाई की अहमियत समझनी चाहिए, ऐतिहासिक आदेश की रक्षा के लिए, अध्यक्ष और सचिवों को कठोर दंड देकर, अपनी मौजूदगी का एहसास कराना चाहिए! तलब करके पूछना चाहिए- जेडएलडी कानून के होते हुए, ऑनलाइन एफ्लूएंट मॉनिटरिंग सिस्टम के होते हुए, 24 मईं 2019 और 26 सितंबर 2019 जैसे ऐतिहासिक आदेश होते हुए, जहरीली नदियां विषैले एक्यूफर छोड़ो इंसानी शरीर में, इंसानी खून में भी, क्रोमियम लेड मरकरी फ्लोराइड आर्सेनिक भर गए!

    भला बताओ- इसे कानून की जीत कैसे कही जा सकती है! हमारे हिसाब से- एनजीटी को अपनी सुनवाई और प्रदूषण एजेंसियों के अपराध, उनके भ्रष्टाचार में अंतर समझना चाहिए! कानपुर में हाहाकार प्रदूषण की सुनवाई बेकार के नारे! 387 सैंपल में, 209 महिलाएं पीड़ित मिली! उनके खून में क्रोमियम मरकरी लेड बहुत ज्यादा मिले हैं! 11 इलाकों में 1हजार लोगों के खून में गंभीर रसायन जैसे- क्रोमियम, मरकरी, फ्लोराइड, लेड मिले!  मगर- सपा शासन से ज्यादा मक्कार योगी की, नौकरशाही बजट नहीं दे रही,  पूरे कानपुर को जहर पिलाने का सच छुपाने के लिए, पैसे ही नहीं दे रही? मुख्यमंत्री योगी को, यूपीपीसीबी यूपी ग्राउंडवाटर और जल निगम, तीनों को कठोर दंड देना चाहिए! तीनों मुखिया पर क्रिमिनल केस चलवाना चाहिए!

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    11 करोड़ की थाली खा गए सरकारी चोर https://rashtriyasamasya.com/11-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%96%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a4%8f-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/ https://rashtriyasamasya.com/11-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%96%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a4%8f-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/#respond Tue, 02 Dec 2025 09:04:44 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=9724 राष्ट्रीय समस्या टीम। 11 करोड़ की थाली खा गए सरकारी चोर..! फिर भी डीएम-बीएसए बिल्कुल दूध के धुले..! मासूम बच्चों को भी नहीं छोड़ा, भला बताओ- इतनी अच्छी खबरें, फिर भी देश विकास नहीं कर पा रहा..! खैर, डीएम साइन करते रहे, बीएसए खुश होते रहे, फिरोज अहमद डकारते रहे, और 11 साल में पूरा 11 करोड़ की थाली सफा चट्ट कर दी सरकारी चोरों ने..! यह हाल है शिक्षा विभाग का..! बहरहाल यूपी का बलरामपुर जिला, फिर सुर्खियों में है, मासूम बच्चों का मध्यान भोजन, सरकारी चोर खाते रहे, मगर हैरानी देखिए ना बच्चे, ना स्कूल, मध्यान भोजन बंटता रहा…! साल 2 साल नहीं पूरे 11 साल खूब खाया गया…! फिलहाल जिला समन्वयक फिरोज अहमद सहित, 44 के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई, अब क्या नतीजा निकलता है….! मासूमों की थाली, अफसर चोरी करके खा गए..! और नहीं मिल पाई वो सब, मुंह मटका कर छा गए..! भला बताओ– हमारे देश का भविष्य कितने अच्छे हाथों में है, मासूम बच्चों को भी नहीं छोड़ा, उनका खाना भी सरकारी डकैत खा गए…! मगर- अच्छी बात यह है कि यह सिर्फ खबर ही रहेगी.., होना कुछ नहीं। इसमें ना किसी को सजा होगी, ना एक रुपए की वसूली होगी, बहरहाल योगी जी के आंगन में चोरी हुई…. इसलिए हो सकता है चोट्टे न बच पाएं…! मगर सवाल है कि 75 साला आजादी के बाद भी, अधिकारियों को पर नहीं मिल पाए। देखो बेचारे– अपाहिज की तरह ऑफिस में बैठे रहते हैं…!

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    मां के दूध में यूरेनियम का गुनहगार कौन… https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%a7-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%be/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%a7-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%be/#respond Sat, 29 Nov 2025 13:44:29 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=9714 मित्रो! ब्रेस्ट मिल्क में यूरेनियम मिला, वैज्ञानिकों ने इसकी पुष्टि कर दी है। दर्जनों माताओं के दूध में जहर ने एक तरफ वैज्ञानिकों की चिंताएं बढ़ा दी, वहीं दूसरी तरफ एनजीटी-सुप्रीम कोर्ट, दोनों के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर दी।

    बहरहाल मां के चुनौती कहा जाये, या मुसीबत खड़ी हो गई, कि जहां एक तरफ तय करना मुश्किल हो गया कि मां-बहने अब अपने बच्चों को जन्म देंगी या एटम बम को, वहीं दूसरी तरफ जो उपलब्धियां पाकिस्तान-आतंकिस्तान जैसे तबाह मुल्क में होनी चाहिए, वह हमारे देश में पैदा हो गईं, ऋषिमुनियों की धरती उगलने लगी, जो हमारे बिहार से पुष्टि की शुरुआत भी हो गई।

    बहरहाल ब्रेस्ट मिल्क में यूरेनियम के गुनहगार दंडित करना एनजीटी सुप्रीम कोर्ट दोनों के लिए गंभीर चुनौती खड़ी हो गयी। ऐसा अपराध जिसने बच्चों की जिंदगी ही 10 साल की रखी, भला बताओ ऐसा विकास नाश की निशानी नहीं तो क्या है?

    ऐसा अपराध, जिसका कारण असंवैधानिक संस्थाएं, या अपने नवजात शिशु को दूध पिलाने वाली माताएं..? ऐसा अपराध जिसकी सजा प्रदूषण बोर्ड को मिले, या मां-बहनों को, तय करना जरूरी भी, और गंभीर चुनौती भी हो गया सुप्रीम कोर्ट के लिए।

    खैर मां के दूध में ऐसा जहर निकला है, जिसे पीते ही जन्म लेने वाला बच्चा या तो खत्म, या उसकी जिंदगी ही 10 साल की रह गई। मगर उससे भी ज्यादा चिंता बढ़ाने वाली विडंम्बनायें ये कि जहां एक तरफ वैज्ञानिक इसे गम्भीर चुनौती मान रहे, वहीं दूसरी तरफ कुछ वैज्ञानिक इसे खतरा नहीं मान रहे। खैर
    बिहार में कई दर्जन महिलाओं के दूध में यूरेनियम पाया गया, कई जिलों की मां-बहनों के दूध में पुष्टि हुई, जिससे वैज्ञानिकों की चिंताएं बढ़ी हैं। मगर वैज्ञानिकों ने कहा कि यूरेनियम का स्तर बहुत कम है और इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर कोई खतरा नहीं है। विशेषज्ञों ने माताओं को बिना चिंता के स्तनपान कराने की सलाह दी है, क्योंकि स्तनपान बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित और सर्वोत्तम पोषण है।

    बिहार के कुछ जिलों में स्टडी के दौरान स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध में यूरेनियम (यू-238) पाया गया है। इस रिपोर्ट ने चिंता जरूर बढ़ाई, लेकिन देश के शीर्ष वैज्ञानिकों ने साफ कहा है कि मिले हुए स्तर बेहद कम हैं और इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

    40 माताओं के दूध के सैंपल लिए गए और सभी में थोड़ी मात्रा में यूरेनियम मिला है। एक स्टडी में ये खुलासा हुआ जो कुछ जिलों में ही नहीं, बल्कि बिहार और पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। खैर स्टडी में सबसे ज्यादा औसत स्तर जिला खगड़िया और सबसे ज्यादा व्यक्तिगत स्तर कटिहार में मिला। एम्स दिल्ली के डॉ. अशोक शर्मा के अनुसार कुछ बच्चों में संभावित ‘नॉन-कार्सिनोजेनिक रिस्क’ दिखा, लेकिन वास्तविक नुकसान की संभावना बहुत कम है। वजह यह कि ज्यादातर यूरेनियम शरीर से मूत्र के जरिए निकल जाता है और दूध में बहुत कम मात्रा पहुंचती है।

    स्टडी के अनुसार, दूध में पाए गए स्तर (0 से 5.25 माइक्रोग्राम/लीटर) डब्ल्यूएचओ के मानकों से काफी नीचे हैं। डब्ल्यूएचओ की सीमा 30 माइक्रोग्राम/लीटर है, यानि छह गुना ज्यादा। जिसके कारण एनडीएमए के न्यूक्लियर वैज्ञानिक डॉ. दिनेश के असवाल ने कहा कि यह स्तर पूरी तरह सुरक्षित सीमा में है किसी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है। माताएं बिना चिंता के स्तनपान जारी रखें। उनका कहना है कि मिट्टी और चट्टानों में स्वाभाविक तौर पर थोड़ा-बहुत यूरेनियम पाया जाता है और विश्वभर में ऐसे अति-क्षुद्र स्तर सामान्य माने जाते हैं।

    परन्तु ऐसा माना जाता है कि लंबे समय तक उच्च स्तर का यूरेनियम बच्चों में किडनी और न्यूरोलॉजिकल विकास पर असर डाल सकता है। लेकिन मौजूदा रिपोर्ट में मिला स्तर इतना कम है कि विशेषज्ञ इसे ‘कमखतरा’ मानते हैं। इसीलिए डॉक्टरों का स्पष्ट सुझाव है कि बच्चों के लिए स्तनपान ही सबसे सुरक्षित और सर्वोत्तम पोषण है। डब्ल्यूएचओ और यूएनआईसीईएफ भी यही सलाह देते हैं।

    शोधकर्ताओं ने बताया कि भविष्य में अन्य राज्यों में भी ऐसे अध्ययन किए जाएंगे ताकि भारी धातुओं और पर्यावरणीय प्रदूषकों जैसे कीटनाशक आदिकी स्थिति का पता चल सके। शोधकर्ता पहले ही आर्सेनिक, लेड और मरकरी जैसे धातुओं पर भी काम कर चुके हैं।

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