User-1 - Rashtriya Samasya https://rashtriyasamasya.com Rashtriya Samasya Tue, 31 Mar 2026 08:01:18 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://rashtriyasamasya.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-rastriya-32x32.png User-1 - Rashtriya Samasya https://rashtriyasamasya.com 32 32 दुनिया का सबसे खूबसूरत किला https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a5%82%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%bf/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a5%82%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%bf/#respond Tue, 31 Mar 2026 08:01:17 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=10275 भारत का सबसे खूबसूरत किला माना जाने वाला मेहरानगढ़ किला राजस्थान के जोधपुर शहर में एक ऊँची चट्टानी पहाड़ी पर लगभग 400 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जो दूर से ही अपनी भव्यता और शाही अंदाज़ से लोगों को आकर्षित करता है। 1459 में राव जोधा द्वारा बनवाया गया यह किला सिर्फ एक किला नहीं बल्कि राजपूताना शान, वीरता और अद्भुत वास्तुकला का शानदार उदाहरण है। किले की विशाल दीवारें इतनी ऊंची और मजबूत हैं कि इन्हें देखकर ही दुश्मन का हौसला टूट जाए, वहीं अंदर प्रवेश करते ही भव्य दरवाजे, नक्काशीदार खिड़कियां और पत्थरों पर की गई महीन कलाकारी इसकी सुंदरता को और भी खास बना देती है। किले के अंदर बने मोती महल, फूल महल, शीश महल, झांकी महल और रंग महल जैसे शानदार महल राजसी जीवन की झलक दिखाते हैं, जहां सोने की सजावट, रंगीन कांच, जालीदार खिड़कियां और दीवारों पर बनी कलाकृतियां आज भी लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। मेहरानगढ़ किले की सबसे खास बात यह है कि इसके ऊपर से पूरा जोधपुर शहर नीले रंग में रंगा हुआ दिखाई देता है, जिसे “ब्लू सिटी” के नाम से जाना जाता है, और यह दृश्य इस किले की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देता है। किले के अंदर बने आंगन, लंबे गलियारे, पुराने हथियारों का संग्रहालय, शाही पालकियां, पोशाकें और ऐतिहासिक वस्तुएं यहां के गौरवशाली इतिहास को जीवंत कर देती हैं। किले के ऊंचे बुर्जों पर रखी विशाल तोपें और पत्थरों से बनी मजबूत संरचना वीरता की कहानियां सुनाती हैं, वहीं किले की दीवारों पर आज भी युद्ध के निशान देखे जा सकते हैं जो इसके गौरवशाली अतीत की याद दिलाते हैं। शाम के समय जब सूरज ढलता है तो किले की सुनहरी रोशनी और नीचे फैला नीला शहर मिलकर ऐसा अद्भुत दृश्य बनाते हैं जो किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लगता। रात में रोशनी से जगमगाता मेहरानगढ़ किला और भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई देता है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक यहां पहुंचते हैं। यह किला सिर्फ अपनी सुंदरता के लिए ही नहीं बल्कि अपनी भव्यता, इतिहास, वास्तुकला और राजपूताना शान के लिए भी जाना जाता है। यही वजह है कि मेहरानगढ़ किला भारत के सबसे खूबसूरत किलों में ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे आकर्षक किलों में भी गिना जाता है, जहां हर पत्थर शाही विरासत और गौरवशाली इतिहास की कहानी सुनाता है।

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दुनिया की सबसे बड़ी पंछी प्रतिमा जटायु की है https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%82%e0%a4%9b%e0%a5%80-%e0%a4%aa/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%82%e0%a4%9b%e0%a5%80-%e0%a4%aa/#respond Fri, 27 Mar 2026 10:39:57 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=10265 केरल में स्थित जटायु की प्रतिमा, दुनिया की सबसे बड़ी पक्षी प्रतिमाओं में है। जो चदयामंगलम में हजार फुट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। रामायण के पात्र जटायु ने जब मां सीता को बचाने के लिए राक्षस राज रावण से युद्ध किया और जब तक बलिदान को समर्पित नहीं हुए, तब तक लड़ता रहा। यहां एक विशाल प्रतिमा जटायु राम मंदिर और एक एडवेंचर सेंटर प्रमुख आकर्षण हैं। यह 200 फीट लंबी, 150 फीट चैड़ी और 70 फीट ऊंची है, जो विश्व की सबसे बड़ी पक्षी मूर्ति है। कहा जाता है कि रावण से युद्ध के दौरान घायल जटायु यहीं गिरे थे। इस स्थान पर एक “राम पदम” (भगवान राम के पदचिह्न) और “कोक्करानी” नामक एक जल कुंड है, जिसे लेकर मान्यता है कि यह जटायु की प्यास बुझाने के लिए बना था। यह स्थान कला, तकनीक, और पर्यटन का संगम है। जहाँ एडवेंचर स्पोर्ट्स की सुविधा है। यहाँ चट्टानों के बीच, एक गुफा में जटायु राम मंदिर बना है। केरल में जटायु-पारा (पहाड़ी) पर जटायु की मृत्यु और अंतिम संस्कार से जुड़े ऐतिहासिक साक्ष्य माने जाते हैं। यहां पहुंचने के लिए 1 हजार फीट से अधिक ऊँची पहाड़ी पर सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यह स्थान भारतीय पौराणिक कथाओं के प्रति सम्मान, महिला सुरक्षा और अद्भुत वास्तुकला का प्रतीक है।

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जेवर एयरपोर्ट मिला योगी की मेहनत मनसा उनकी रण कुशलता को..! https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%b0-%e0%a4%8f%e0%a4%af%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%95/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%b0-%e0%a4%8f%e0%a4%af%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%95/#respond Fri, 27 Mar 2026 07:53:38 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=10260 ना हरियाणा को ना राजस्थान को जेवर एयरपोर्ट मिला यूपी को.! 5100 हेक्टेयर में फैला एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट, अब हमें हमारे देश को 56 से ज्यादा देशों से जोड़ेगा। 28 मार्च को जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन होगा। मुख्यमंत्री योगी की मौजूदगी में पीएम नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे.! अब जुटे हैं या दफ्तरों में है या जब तक टोली बनाकर घूम लेते हैं, सच्चाई तो जमीनी हालात को ही पता है मगर जिला प्रशासन कहना यही है कि वह पूरी तरह तैयारी में है। उद्घाटन को लेकर एक हाई लेवल बैठक आयोजित की गई है। बैठक में सभी विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई। सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक और पार्किंग को लेकर विशेष निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जेवर एयरपोर्ट की निगरानी सीसीटीवी कैमरे और कंट्रोल रूम से की जाएगी। अंतरराष्ट्रीय नोएडा एयरपोर्ट की नींव वर्ष 2001 में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने प्रस्ताव पेश किया था। 2 साल बाद अटल बिहारी वाजपेयी की तत्कालीन सरकार ने रिपोर्ट स्वीकार की। इस एयरपोर्ट को कभी हरियाणा, कभी राजस्थान तो कभी यूपी के अन्य शहरों में ले जाने की कोशिश होती रही। मगर साल 2014 को इस योजना को नई उड़ान मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 नवंबर 2021 को यूपी में जेवर के पास नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की नींव रखी थी। 5100 हेक्टेयर में विस्तृत एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा।

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शांति और पवित्रता की अनोखी जगह ऋषिकेश.! https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%96/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%96/#respond Thu, 26 Mar 2026 10:59:48 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=10254 आत्म शांति और प्राकृतिक के दर्शन यही होते हैं गंगा तट पर बसा ऋषिकेश प्रकृति और आध्यात्म का एक ऐसा अनूठा संगम है जहां पहुंचते ही मन की चंचलता रुक जाती है पहाड़ों को चीरती हुई नीले कांच सी चमकती गंगा जब यहां पहुंचती है तो इंसानी रोग और इंसानी आध्यात्म धोने की शुरुआत करती है तन और मन दोनों को पवित्र कर देती है। हिमालय की तलहटी में स्थित यह नगरी ऋषियों और मुनियों की तप स्थली है। जहां की मिट्टी में आज भी साधना की महक बाकी है। त्रिवेणी घाट पर जब हजारों दिए गंगा की लहरों पर तैरते हैं तो ऐसा लगता है मानो आकाश के तारे धरती पर उतर आए हो। ऋषिकेश, उत्तराखंड का एक छोटा सा शहर है, जो गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है। यह शहर हिंदू धर्म के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। ऋषिकेश योग और ध्यान के लिए एक प्रसिद्ध केंद्र है। यहां कई योग आश्रम और संस्थान हैं जहां लोग योग और ध्यान की शिक्षा ले सकते हैं।

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आमेर फोर्ट– नक्काशी और वास्तु कला की एक जिंदा मिसाल.! https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%86%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%ab%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%86%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%ab%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8/#respond Thu, 26 Mar 2026 08:04:10 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=10248 जयपुर शहर से 11 किमी0 की दूर आमेर कस्बा की एक छोटी पहाड़ी पर बना है, क्यों क्योंकि माओटा झील के पास है इसलिए इसकी सुंदरता थोड़ी और ज्यादा बताई जाती है। राजा काकिल देव ने नीव रखी, उसके बाद 16वीं शताब्दी में राजा मानसिंह ने इस किले को अपने हिसाब से बनवाया था। जो आज भी अपनी सुंदर वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। आमेर किल्ला का इतिहास 11वीं शताब्दी से शुरू होता है, जब यह किला राजा काकिल देव ने बनवाया था। बाद में, 16वीं शताब्दी में, राजा मानसिंह ने इस किल्ले को फिर से बनवाया और इसे अपनी राजधानी बनाया। अकबर के समय में अमर किल्ला एक महत्वपूर्ण केंद्र था। किल्ले के अंदर कई सुंदर महल, बाग, और मंदिर हैं और यह किला एक सार्वजनिक स्थल भी है जहां राजा अपने लोगों व अपने अधिकारियों से मिलते थे। आमेर किल्ला की वास्तुकला में मुगल और राजपूत शैली का मिश्रण है। किल्ले की दीवारें लाल पत्थर और संगमरमर से बनी हैं जो अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। आमेर किल्ला यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है। यह किला हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है।

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राजाजी पार्क के पास बना एलिवेटेड https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%b2/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%b2/#respond Thu, 26 Mar 2026 06:01:41 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=10243 राजाजी पार्क के जंगली जानवर अब बिल्कुल नहीं देख पाओगे दोस्तों- क्योंकि 16km लंबा और आसमान छूता एलिवेटेड अब जानवरों की रक्षा करेगा राजाजी पार्क के पास एलिवेटेड बन जाने से ’वन्य जीव दिखाई भी नहीं देंगे, और उन्हें सुकून भी मिलेगा..! बिल्कुल सही कहा–’दिल्ली देहरादून रास्ते पर वन्यजीवों को अक्सर नुकसान होता था। कुछ जानवर इंसान व उनके वाहनों पर हमला करते थे, तो कुछ इंसान वन्य जीवों को सताते थे, उन्हें नुकसान करते थे। मगर अब वह सब बिल्कुल बंद हो गया, इधर राजाजी पार्क से देहरादून तक 12 किमी लंबा एलिवेटेड बन जाने से जंगल उनके वन्य जीव इतने नीचे छूट गए की दिखाई भी नहीं देंगे, उधर 45 मिनट का सफर सिर्फ 15 मिनट में पूरा होगा..!

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छत्रपति की अनोखी निशानी सिंधु दुर्ग https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%9b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%96%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b8/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%9b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%96%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b8/#respond Thu, 26 Mar 2026 05:48:47 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=10238 सिंधुदुर्ग एक ऐसा किला, जिसकी बनावट ही दुश्मन की बुरी हार है.! जैसा राजा, वैसा साहस, वैसी ही सूझबूझ, दोस्तों— हम बात कर रहे हैं छत्रपति शिवाजी की, और उनके खुद के बनवाए सिंधुदुर्ग किले की। बिल्कुल सही कहा 1664 में सिंधुदुर्ग किला बनवाया.! जिसे बनाने में पूरे 3 साल लगे, मतलब 1667 में सिंधुदुर्ग तैयार हुआ..! समुद्र के किसी भी हिस्से से किले का दरवाजा ना दिखाई दे, शिवाजी की यह पहली सूझबूझ थी, यही इस किले की पहली खूबसूरती है….! हालांकि किले में बाहरी एंट्रेंस, इतनी सकरी इतनी घुमावदार जिससे हाथी, सैनिक सभी थक जाएं, फिर भी ना एंट्री मिले, ना दरवाजा तोड़ पाए, मुख्य द्वार के ऊपर से गरम तेल की धार बहाने की ऐसी शानदार बनावट थी, जिससे दुश्मन, उसके सैनिक, उसके हाथी घोड़े, जल जाए, मर जाए या भाग जाए। मगर किले में घुसना तो दूर, भविष्य में हमला करना भूल जाएं..! मगर किले के अंदर से निकलने वाले शिवाजी के सैनिकों को तलवार घुमाने, शत्रु पर हमला करने का पूरा मौका मिले, सिंधु दुर्ग बनाने की यह सबसे अनोखी चतुराई थी।

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क्षेत्रफल में छोटा संस्कृति, प्रकृति और अध्यात्म में बड़ा.! https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ab%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ab%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95/#respond Wed, 25 Mar 2026 11:28:45 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=10228 निशांत सिंह संग खुशी शर्मा

क्षेत्रफल में छोटा मगर संस्कृति प्रकृति और अध्यात्म शक्ति में बड़ा दोस्तों आज हम उस देश की बात कर रहे हैं। जो भारत का पड़ोसी होते हुए यहां की प्राकृतिक सुंदरता में बिल्कुल कमी नहीं है। आइए दिखाते हैं कहानी लिखते हैं एक ऐसे देश की जो आकार में भले ही छोटा हो लेकिन संस्कृति, प्रकृति और अध्यात्म में बहुत बड़ा है। यह देश है नेपाल। नेपाल भारत और चीन के बीच बसा एक लैंड लॉक देश है। इसकी सीमाएं उत्तर में तिब्बत और बाकी तीन भारत से लगती है। लेकिन इस छोटे से भूभाग में प्रकृति का एक ऐसा खजाना छुपा है जो पूरी दुनिया को आकर्षित करता है। नेपाल को “हिमालयों की भूमि” कहा जाता है, क्योंकि विश्व की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला हिमालय यहीं से होकर गुजरती है और सबसे ऊंचा पर्वत यानी माउंट एरेस्ट भी इसी जगह पर है। जो 8848 मीटर ऊंचा है, वह भी नेपाल की धरती पर ही है। यहां कुल आठ पर्वत ऐसे हैं जो दुनिया के 10 सबसे ऊंचे पहाड़ों में गिने जाते हैं। शेरपा याक, हिमनद ग्लेशियर हर मोड़ पर पहाड़ों की कहानियां बसी हुई हैं। नेपाल की राजधानी है काठमांडू जो देश की सबसे बड़ी आबादी वाला शहर है। यहां के पुराने मंदिर, स्तूप और दरबार, स्क्वायर जैसे ऐतिहासिक स्थल नेपाल की सांस्कृतिक विरासत की झलक देते हैं। नेपाल एक ऐसी जगह है जहां प्रकृति बोलती है, जहां संस्कृति सांस लेती है और जहां आत्मा को सुकून मिलता है। यहां पहाड़ों के बीच आप अपने से एक अच्छी और शांतिप्रिय मुलाकात कर सकते हैं।

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केसर की राजधानी https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b8%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b8%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/#respond Wed, 25 Mar 2026 07:49:20 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=10222 भारत का एक ऐसा जिला जिसे केसर का राजधानी कहा जाता है, दोस्तों..! कश्मीर का पामपुर ऐसा एरिया है जहाँ का केसर पूरी दुनियां में कहीं नहीं मिलता। केसर दुनिया के सबसे महंगे और कीमती मसालों में से एक माना जाता है। इसकी खुशबू, रंग और औषधीय गुण इसे बाकी मसालों से अलग बनाते हैं, लेकिन केसर को हर जगह उगाना संभव नहीं है, क्योंकि इसके लिए खास जलवायु और मिट्टी की जरूरत होती है। भारत में भी केसर का उत्पादन सीमित इलाकों तक ही सिमटा हुआ है। दरअसल, जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में स्थित पामपुर को भारत का ‘केसर कैपिटल’ कहा जाता है, क्योंकि यहां देश का सबसे ज्यादा और सबसे बेहतरीन केसर उगता होता है। पामपुर का केसर गहरे लाल रंग, तेज खुशबू और उच्च रंग क्षमता के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। सदियों से यहां केसर की खेती की परंपरा चली आ रही है और यह इलाका आज भी कश्मीरी केसर की पहचान बना हुआ है। भारत में केसर का उत्पादन लगभग पूरी तरह से जम्मू-कश्मीर राज्य तक सीमित है। देश में जितना भी केसर पैदा होता है, उसका अधिकांश हिस्सा इसी राज्य से आता है। पामपुर को इस पूरे क्षेत्र का सबसे बड़ा और प्रमुख केसर उत्पादक केंद्र माना जाता है। वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो ईरान दुनिया का सबसे बड़ा केसर उत्पादक देश है। इसके बाद अफगानिस्तान, स्पेन और भारत का स्थान आता है। हालांकि, उत्पादन मात्रा कम होने के बावजूद कश्मीरी केसर को गुणवत्ता में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ केसरों में गिना जाता है।

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शक्ति का साक्षात दर्शन https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8/ https://rashtriyasamasya.com/%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8/#respond Wed, 25 Mar 2026 06:55:39 +0000 https://rashtriyasamasya.com/?p=10217 ऐसी ज्योति जो कभी नहीं बुझती, ऐसी ज्योति जो न जाने कब से जल रही मूर्ति नहीं, घी नहीं, बत्ती नहीं, फिर भी जल रही 24 घंटे जल रही 365 दिन जल रही भला बताओ- ऐसी उपलब्धि ऐसा चमत्कार और किस देश में देखा सुना है बहरहाल, हिमाचल का कांगड़ा ऐसा एरिया है जहां शक्ति ने खुद अपना चमत्कार दिखाया है.! भक्तों की अद्भुत श्रद्धा की ज्योति जो हिमाचल की बर्फीली पहाड़ियों के बीच बिना किसी स्त्रोत के ज्वाला रूप में विराजमान हैं। यहां मंदिर के मुख्य भाग में कोई मूर्ति नहीं बल्कि अखंड ज्योति है जो बिना घी, बत्ती के चैबीसों घंटे जलती रहती है। मंदिर के गर्भगृह में कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि अखंड ज्योति स्वयं देवी के रूप में प्रज्वलित है। जो कि आज तक कभी बुझी है और न ही इसकी लौ में कोई कमी आई है। मंदिर में कुल 9 ज्वालाएं है, जो सदियों से लगातार जल रही हैं। इन्हें देवी के नौ रूपों- महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, हिंगलाज भवानी, विंध्यवासिनी, अन्नपूर्णा, चंडी देवी, अंजना देवी और अंबिका देवी के रूप में पूजा जाता है। भक्तों का मानना है कि ये ज्वालाएं स्वयं देवी का मुख हैं, इसलिए इस स्थान को “ज्वालामुखी” कहा जाता है। यहां की एक और विशेषता यह है कि जब प्रसाद चढ़ाया जाता है, तो वह जलता नहीं, केवल ज्वाला ही प्रज्वलित रहती है। पूजा-अर्चना के बाद दिए जाने वाले चरणामृत में भी कई बार लौ के दर्शन होने की बात कही जाती है, जिसे भक्त शक्ति का चमत्कार मानते हैं।

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