Home पर्यावरण 2400 टन कचरे में मात्र 700 टन का निपटान

2400 टन कचरे में मात्र 700 टन का निपटान

  • एमसीडी की नाकामी पर एनजीटी की सख्ती
  • एडवोकेट कमिश्नर की रिपोर्ट से खुलासा
  • एमसीडी को हलफनामा दाखिल करने का आदेश

(निशांत सिंह)
नई दिल्ली 18 जुलाई। 40 मीटर ऊंचा डंपिंग ग्राउंड 60 मीटर कैसे हो गया? मामले की सुनवाई करते हुए चेयरपर्सन प्रकाश श्रीवास्तव ने कड़ी फटकार लगाते हुए एमसीडी से जवाब तलब किया है। एडवोकेट कमिश्नर की रिपोर्ट पर एनजीटी उस समय भड़क गयी जब 40 मीटर ऊंचा डंपिंग ग्राउंड 60 मीटर ऊंचाई छूने लगा। रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा कि 2400 से 2600 टन कचड़ा रोज निस्तारित होने के वजाय 700 से 1000 टन ही प्रोसेस होता मिला, ऊपर से वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चलते मिला। जस्टिस सुधीर अग्रवाल, विशेषज्ञ ए0 सेंथल वेल ने कड़ी फटकार लगाते हुए एमसीडी को 6 हफ्ते में जवाब दाखिल करने के आदेश दिये।
दरअसल एनजीटी ने इस मामले को स्वतः संज्ञान लिया था, जिसपर एडवोकेट कमिश्नर को जांच करके रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश थे, वही रिपोर्ट रिकाॅर्ड पर आते ही एमसीडी की असफलता साफ-साफ दिखने लगी।
अप्रैल 2024 में गाजीपुर कूड़ाघर पर आग लगने से संबंधित एक अखबार में छपी खबर पर एनजीटी द्वारा ‘‘सुओ मोटो’’ संज्ञान लिया गया था, जिसके बाद एनजीटी के आदेश दि0 07.03.2025 के पालन में एडवोकेट कमिश्नर को नियुक्त किया गया था, जिन्होने गाजीपुर कूड़ाघर साइट का निरीक्षण के उपरान्त अपनी रिपोर्ट दि0 29.03.2025 को दाखिल की, जिसपर एनजीटी में दि0 02.04.2025 को सुनवाई हुई।
रिपोर्ट में पाया गया था कि (1) कूड़े का ढेर 60 मीटर से ज्यादा ऊँचा हो गया है, जबकि नियम अनुसार 40 मीटर ही होना चाहिए, (2) कूड़ाघर घनी आबादी के पास, एक नहर और नाले के बगल में है, (3) एमसीडी द्वारा पांच एकड़ जमीन के साफ होने का दावा किया गया, पर वहाँ निरीक्षण के समय भी काम चल रहा है, जिससे जाहिर है कि जमीन पूरी तरह से नहीं साफ हुई, (4) कूड़ा नाले में गिर रहा है क्योंकि चारों ओर कोई दीवार नहीं बनी है, (5) मीथेन गैस का प्रबंध नहीं किया गया, जिससे आग लगने का खतरा है, (6) लीचेट टैंक से गंदा पानी निकलकर यमुना में जा रहा है, (7) लैंडफिल के पास मछली मंडी, पशु मंडी और डेयरी है, जो एनसीआर को सप्लाई करती है, जिसके कारण आसपास के क्षेत्र में स्वास्थ्य को खतरा है।
इस रिपोर्ट के बाद एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) द्वारा जवाब दिया गया था कि (1) दैनिक कचरा 2400-2600 टन है, जिसमें से केवल 700-1000 टन ही प्रोसेस होता है (2) वेस्ट टू एनर्जी प्लांट अभी पूरी क्षमता से नहीं चल रहा, (3) बायोमाइनिंग से हर दिन 10,000 टन कचरा हटाया जा रहा है, (4) लीचेट को ओखला ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जा रहा है, (5) अधूरी दीवारों के लिए सरकार से 24.17 करोड़ की मांग की गई है।
एमसीडी के ऐसे नाकामी भरे जवाब से नाखुश होते हुए एनजीटी ने सख्त आदेश किया कि एमसीडी को जवाब देना होगा कि पुराने कचरे को कब तक हटाया जायेगा (2028 लक्ष्य) और कैसे हटाया जायेगा, लीचेट और वेस्ट के महीनेवार आंकड़े, ट्रकों की संख्या, और निपटान प्रक्रिया की जानकारी, मीथेन गैस को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था पर सफाई, सी-एण्ड-डी वेस्ट (निर्माण कचरा) को मिलाने से प्रोसेसिंग पर असर तो नहीं हो रहा, इससे सम्बंधित विवरण सहित डब्ल्यूईटी प्लांट की असल क्षमता, बिजली उत्पादन, और ग्रिड में भेजे गए यूनिट्स की जानकारी के साथ एमसीडी हलफनामा में अपनी रिपोर्ट दाखिल करे।

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