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शक्ति का साक्षात दर्शन

ऐसी ज्योति जो कभी नहीं बुझती, ऐसी ज्योति जो न जाने कब से जल रही मूर्ति नहीं, घी नहीं, बत्ती नहीं, फिर भी जल रही 24 घंटे जल रही 365 दिन जल रही भला बताओ- ऐसी उपलब्धि ऐसा चमत्कार और किस देश में देखा सुना है बहरहाल, हिमाचल का कांगड़ा ऐसा एरिया है जहां शक्ति ने खुद अपना चमत्कार दिखाया है.! भक्तों की अद्भुत श्रद्धा की ज्योति जो हिमाचल की बर्फीली पहाड़ियों के बीच बिना किसी स्त्रोत के ज्वाला रूप में विराजमान हैं। यहां मंदिर के मुख्य भाग में कोई मूर्ति नहीं बल्कि अखंड ज्योति है जो बिना घी, बत्ती के चैबीसों घंटे जलती रहती है। मंदिर के गर्भगृह में कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि अखंड ज्योति स्वयं देवी के रूप में प्रज्वलित है। जो कि आज तक कभी बुझी है और न ही इसकी लौ में कोई कमी आई है। मंदिर में कुल 9 ज्वालाएं है, जो सदियों से लगातार जल रही हैं। इन्हें देवी के नौ रूपों- महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, हिंगलाज भवानी, विंध्यवासिनी, अन्नपूर्णा, चंडी देवी, अंजना देवी और अंबिका देवी के रूप में पूजा जाता है। भक्तों का मानना है कि ये ज्वालाएं स्वयं देवी का मुख हैं, इसलिए इस स्थान को “ज्वालामुखी” कहा जाता है। यहां की एक और विशेषता यह है कि जब प्रसाद चढ़ाया जाता है, तो वह जलता नहीं, केवल ज्वाला ही प्रज्वलित रहती है। पूजा-अर्चना के बाद दिए जाने वाले चरणामृत में भी कई बार लौ के दर्शन होने की बात कही जाती है, जिसे भक्त शक्ति का चमत्कार मानते हैं।

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