देश के चर्चित मशहूर किलों में भानगढ़ का इतिहास सबसे अलग है। इसके मेन गेट से किले की दूरी 1 किमी. है। सूर्योदय से पहले यहां कोई नहीं आ सकता, मगर सूर्यास्त के बाद भी यहां कोई नहीं रह सकता। बड़े-बड़े आक्रमणकारियों ने इस किले पर हमले किए हैं। किले के चारों ओर ऊंची और मजबूत दीवारें बनी हैं जो उस समय की उत्कृष्ट वास्तुकला को दर्शाती हैं। भानगढ़ किला राजस्थान के अलवर जिले में सरिष्का टाइगर रिजर्व के निकट स्थित है। इसे 17वीं सदी के मध्य में राजा माधव सिंह ने बनवाया था जो कि अंबर के राजा थे। किले की बनावट में राजपूत शैली की झलक साफ तौर पर दिखाई देती है। जिसमें भव्य महल, मंदिर और किले के गेट शामिल हैं। भानगढ़ किले पर कई बार आक्रमण हुए। मुख्य रूप से मुगल शासक और आसपास के अन्य प्रतिद्वंदी राजाओं ने किले पर हमले किए। इसके अलावा भानगढ़ किले पर अलग-अलग समय पर कई राजाओं ने शासन किया। शुरुआत में राजा माधव सिंह ने इसे बनवाया और उसके बाद अलग-अलग समय पर अलग-अलग शासकों का शासन यहां रहा। किले के इतिहास में कई बार आक्रमणों के कारण किले की स्थिति में उतार-चढ़ाव भी आए। धीरे-धीरे किले पर शासन शासन करने वाले राजाओं की संख्या भी बदलती रही। इस तरह भानगढ़ किला एक समृद्ध और जटिल इतिहास का गवाह है। किले के बारे में सबसे मशहूर बात यह है कि इसे भूतिया स्थल माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि किले में एक राजकुमारी और एक तांत्रिक के बीच प्रेम संबंध था जो अंत में दुर्भाग्यपूर्ण रूप से समाप्त हो गया। इस कहानी के कारण लोग मानते हैं कि किले में आत्माओं का वास है। इसके अलावा भानगढ़ किले का इतिहास और उसकी वास्तुकला भी शोधकर्ताओं और इतिहास प्रेमियों के लिए काफी आकर्षक है।
