पिंजोर गौशाला (हरियाणा)
यहां बेसहारा बीमार और घायल गायों की सेवा और देखभाल की जाती है। क्योंकि भारतीय संस्कृति उन्हें मनुष्यों के समान मानती है और गाय को विश्व माता माना जाता है।
पथमेड़ा गौशाला (राजस्थान)
यह देश की सबसे बड़ी गौशाला में से एक है। ये गौशाला गौ संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्वच्छता के सख्त मानकों का पालन किया जाता है और अत्याधुनिक सुविधाओं में पशुओं या प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना उत्पाद तैयार किए जाते हैं। यहां गायों का शोषण नहीं किया जाता है।
वृंदावन गौशाला (उत्तर प्रदेश)
वृंदावन के गौशाला गायों की सेवा और संरक्षण के लिए समर्पित हैं। जहां सैकड़ों देसी गायों की देखभाल की जाती है, और उन्हें सुरक्षित व स्वच्छ वातावरण मिलता है। साथ ही गौ सेवा और गौ दान जैसी सेवाएं भी उपलब्ध हैं। जो बच्चों को गौ सेवा का महत्व सिखाती हैं और पवित्र स्थल के रूप में पुराने वृंदावन जैसा अनुभव देती हैं। जहां गायों को सम्मानपूर्वक रखा जाता है।
कामधेनु गौशाला (गुजरात)
कामधेनु को समुद्र मंथन से उत्पन्न एक दिव्य गाय माना जाता है। जो सभी इच्छाएं पूरी करती है और जिसे देवताओं का प्रतीक माना जाता है। जिससे इन गौशालाओं को एक पवित्र दर्जा मिलता है। यहां गायों के लिए आधुनिक चिकित्सा और देखभाल की व्यवस्था है।
मथुरा गौशाला (उत्तर प्रदेश)
इस गौशाला में गौ उत्पाद भी बनाए जाते हैं। गौशाला वे स्थान है जहां बेसहारा, बीमार और वृद्ध गायों की देखभाल की जाती है। भारतीय संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया जाता है। इसलिए उसकी सेवा को पूर्ण कार्य माना जाता है। गौशाला में गायों को सुरक्षित वातावरण, चारा, पानी आवश्यक चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाती है। कई गौशाला दान और समाज के सहयोग से संचालित होते हैं। गौशाला ना केवल पशु कल्याण का केंद्र है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण जैविक खेती को भी बढ़ावा देती है।









