अत्याचार की फैक्ट्री में अनैतिकता के लाइसेंस.! मगर निदासी जागरूकता और भ्रष्ट अफसरी के दौर में, अदालती सुनवाई बिल्कुल नहीं बिगड़नी चाहिए, दोषियों को कड़ी सजा बिना उनका पिंड बिल्कुल नहीं छूटना चाहिए.!
देखो- बिना लाइसेंस हजार भैंस रोज काटी, बिना ईटीपी हजार केएलडी, खून पानी चर्बी नदी को पिलाई, फिर भी दोषियों को सजा नहीं दी, यह भ्रष्टाचार नहीं तो क्या है.? लिहाजा हमारे हिसाब से सृष्टि तबाही का अपराध एनजीटी को बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए, कानून प्रकृति दोनों के दोषियों को कठोर दंड देना चाहिए.! देखो- इतना किया विकास की अब, उधार की सांसें लेते हैं.! पीने के पानी संग केमिकल के घूंट निगलते हैं..! आसमान के चांद सितारे मुट्ठी में भर लेते हैं..! इतने गुनी लोग सिस्टम में कुदरत को डस लेते हैं…!
दोस्तों- आईएएस अफसर अगर ऐसी गलतियां करने लग जाएं, जिससे कानून प्रकृति दोनों तबाह होने लग जाएं, सांस प्यास दोनों का संकट खड़ा हो जाए तो वहां अदालती सुनवाई उसका आदेश दोनों का रूप बदलना चाहिए, दोषियों को कठोर दंड देकर इंसाफ जिंदा के सबूत छोड़ने चाहिए.!
मित्रों- हजार करोड़ के बीफ ने पूरा सिस्टम तमाशा बना दिया, या रुपया के सामने सिस्टम खुद तमाशा बन गया, एक-एक पहलू बताएंगे, तथ्यों के साथ समझाएंगे..! दोस्तों– बिना लाइसेंस लाखों भैंस कटवा दी, अरबो का बीफ तमाम बिदेशों में बेच दिया, मगर उसमें जो गंदगी निकली, वो नाला नदी को पिला दी, कानून को धोखा दे दिया, देखो– नाला नदी तालाब सब रंगीन हो रहे.! कुछ नहीं कर पाई नौकरशाही, सुप्रीम आदेश धरा का धरा रह गया..!
एक तरफ नया मोइन कुरैशी दूसरी तरफ बरेली लखनऊ से लेकर दिल्ली तक का सिस्टम और फिर भी बंदर और मदारी जैसा खेल हो गया दोस्तों! इधर नए मोइन कुरैशी ने पूरा सिस्टम पूरी व्यवस्था को बंदर और मदारी जैसा खेल दिखाया। देश की आस्था बर्बाद कर दी। संतों की तपस्या पैरों से कुचल दी। हाई कोर्ट से छल कपट करके फैक्ट्री खुलवा ली। उधर जिम्मेदार आईएएस अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट अथवा एनजीटी दोनों को कुछ नहीं बताया। आदेश कंप्लायंस के लिए झूठी ही रिपोर्ट लिखवाते रहे। क्योंकि वहां कागज में कुछ भी लिख लो। कुछ भी बोल बता लो। मगर बीमारी मुक्त इंसान, समाज रख पाना बिल्कुल असंभव है। आईएएस अधिकारियों के काम, उनकी निगरानी, उनकी जिम्मेदारी देश की तबाही दिखाने लग जाए। सूखी नदियां, बहते पहाड़, प्यासे शहर दिखाने लग जाएं। वहां अदालती फैसले, जजमेंट हो सकते हैं। मगर उनमें इंसाफ बिल्कुल नहीं कहा जा सकता।
दोस्तों! अब आपको दिखाता हूं एक ऐसा मसला जो आपने कभी नहीं सुना होगा। ऐसा मसला और ऐसा घोटाला देश आईएएस अधिकारी ही चलाते हैं। मगर कुछ आईएएस अधिकारियों ने अब ऐसा कर दिया है जिससे यह कहना पड़ रहा है एक एग्जांपल देना पड़ रहा है। देखिए बरेली शहर है यूपी का। यहां पांच आईएएस अफसरों ने इतनी मेहनत की कि सरकारी स्लॉटर हाउस थरथर कांपने लगा। बेचारा इतना डर गया, इतना डर गया कि बिना लाइसेंस लाखों भैंस कटवाने लगा। अरबों का बीफ विदेशों में बिकवाने लगा। इतने बड़े अत्याचार ऐसी अनैतिक गतिविधियां कराने लगा कि इधर नाला नदी सब रंगीन होने लगे। कैसे होने लगे? समझ रहे है ना? हजारों भैंसें बिना लाइसेंस कटवाओगे। कई लाख भैंस बिना लाइसेंस कटवाए। करोड़ों लीटर नाला नदी में बहाओगे तो क्या होगा? इधर नाला नदी तालाब सब रंगीन होने लगे। तालाब में करनाल टेक्नोलॉजी में तालाब में जिसे इन्होंने क्या कहा? करनाल टेक्नोलॉजी। मतलब तालाब में करनाल टेक्नोलॉजी में ट्रकों चर्बी उतराने लगी। ट्रकों चर्बी उतराने लगी। उसमें से छह जगह से नाले फोड़ रखे हैं नालियां। जरा उनका रंग देखिए। रंगीन हो रहे हैं। बिल्कुल क्या कहा जाए? कह नहीं सकते। तो क्या हुआ मित्रों? इधर नदी, नाला, तालाब सब रंगीन होने लगे। तालाब में जिसे इन्होंने करनाल टेक्नोलॉजी कहा। करनाल टेक्नोलॉजी में ट्रकों चर्बी उतरने लगे और उधर क्या हुआ? अब उधर का हाल देखिए। उधर आईएस अधिकारियों ने हाई कोर्ट में छल कपट शुरू कर दिया। क्या उधर आईएस अधिकारी हाई कोर्ट में छल कपट कराने लगे। एनजीटी में तथ्य छुपाने लगे। सुप्रीम कोर्ट में झूठी ही रिपोर्ट देने लगे। अब दोस्तों देखिए तालाब की दशा देखो जरा दिखाइए। इसमें कई ट्रक चर्बी भरी जा सकती है। इसी में चार नालियां निकाल रखी हैं। देखिए यह धारा प्रवाह है। ये धारा प्रवाह है। देखिए इनके रंग देखिए। इनकी दशा देखिए। अच्छा ये दिन में तो बज-बजा रही हैं। रंगीन दिखाई दे रही है। नालियां देख रहे हो? दिन में यह बज बजा रही हैं। रात में इसमें रंगीन धाराएं बहती हैं। तरह-तरह की धाराएं बहती हैं। जरा ये गांव देखिए। वहां का नाला देखिए। बिल्कुल लाल बहरा नदी। पता नहीं कहां की ये नदी हमारे देश की तो नहीं है।
मित्रों! इन्हें सन्यासी जैसे की छवि की परवाह नहीं बताई है। लाखों भैंस बिना लाइसेंस कटवा दी। अरबों का बीफ विदेशों में बिकवा दिया। पांच सबूत दिखाएंगे। देखिए पहले तो लेसन से देखिए जो उत्तर प्रदेश प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने दिया है इन्हें जिसे कंसेंट कहते हैं। क्या लिखा? 300 भैंस काट सकते हैं। 300 ठीक। अब इन्होंने लाइसेंस लिया 300 का और 1300 भैंस काटी। अब 13 लाइसेंस 300 का लिया ये तो साबित हो गया। अब 1300 भैंस काटी। उसका सबूत दूसरा देखिए फूड सेफ्टी कमिश्नर उत्तर प्रदेश का लेटर देखिए कार्यवाही देखिए! देखिए क्या लिखा इस स्लॉटर हाउस में 300 भैंस काटने का लाइसेंस है 1300 भैंस काटी किसी दिन 1200 भैंस काटी किसी दिन 1100 भैंस काटी किसी दिन 1350 भैंस काटी बताइए बताइए ये सरकारी स्लॉटर हाउस का हाल है।
मित्रों तो अब उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इंस्पेक्शन रिपोर्ट देख लीजिए। इसमें पॉइंट नंबर से देखिए। ये पॉइंट नंबर चाहे तो 18 देखो 19 देखो 17 देखो क्या लिखा है? 30 भैंस के बच्चे मिले स्लॉटर हाउस में। बताइए स्लॉटरिंग एरिया में जहां बच्चे जहां जानवर कटते हैं वहां काटने के अलावा और कुछ नहीं है। वहां 30 भैंस के बच्चे मिल गए। बताइए वहां 300 का लाइसेंस वहां मिले 1200 भैंस बताइए। अब यहां 300 भैंस काटने का लाइसेंस लिया। तो उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसमें क्या कहा कि 303 केएलडी की ईटीपी लगा दी कि इससे आप जो भी बहाएंगे उसे ट्रीट करके आप बहाएंगे। ठीक 303 केएलडी की। अब 1300 भैंस काट डाली। ईटीपी उसकी सफाई का ब्लड चर्बी साफ करने की मतलब जो है वह उपकरण है जो संयंत्र है वो 300 भैंस का है मतलब 1000 भैंस बिना लाइसेंस काटे ना उसमें ईटीपी है ना उसमें लाइसेंस है बताइए ये नाला नदी रंगीन होंगे या नहीं होंगे बताइए कुंभ जैसा मेला इन अधिकारियों ने निकाल दिया बताइए अब समस्या ये है कि इन्हें घमंड बहुत बड़ा है ये दरअसल ये देखते हैं कि जो भी हम लिख देंगे वही सत्य होगा। हम अगर कोर्ट में केस करेंगे तो ये कह देंगे ये तो बेईमान आदमी है। जज साहब इसने टारगेट कर लिया है। और अगर जज साहब भी यही मान ले सबूत कोई नहीं। टारगेट कर लिया तो दशा तो यही होगी ना। तो दोस्तों सुप्रीम कोर्ट ने पांच आईएएस अधिकारियों को जो ड्यूटी दी है कि किसी भी स्लॉटर हाउस में 24 कंपाउंडियम का कंप्लायंस होना चाहिए। अब उस 24 कंपाउंडियम में क्या है?
पहले तो यह देखें कि कौन वो आईएएस अधिकारी हैं जिन्हें जिन्हें तैनात किया गया है। स्लॉटर हाउस चलाने की जिम्मेदारी दी गई है। स्लॉटर हाउस किन्हें-किन्हें दिया गया है? तो सबसे पहला उसमें है चेयरमैन यूपीपीसीबी चाहे चेयरमैन हो चाहे सेक्रेटरी हो। बताइए आईएएस है या नहीं? किसी भी पीसीबी के हो चाहे यूपी दिल्ली कहीं के भी हो। लेकिन यहां मसला क्योंकि बरेली का है। यहां यूपीपीसी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का है। तो पांच आईएएस अधिकारी कौन है? पहले हैं उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन साहब। ठीक, दूसरे कौन है? जिला अधिकारी बरेली आईएस हैं। तीसरे कौन है? नगर निगम का स्लॉटर हाउस है तो नगर आयुक्त हैं। कमिश्नर नगर निगम। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने नगर विकास सेक्रेटरी को जिम्मेदारी दी है। लेकिन उनसे उनके अगर जूनियर हैं नगर आयुक्त कमिश्नर साहब हैं वो भी आईएएस हैं। अब तीन हो गए। चैथे एनिमल डायरेक्टर एनिमल हस्बेंडरी के डायरेक्टर साहब। भले वो वहां सीबीओ करें या वो डॉक्टर है। मगर एनिमल वो भी आईएस है डायरेक्टर साहब। ठीक? चार हो गए। पांचव है फूड सेफ्टी कमिश्नर यूपी पांच आईएएस अधिकारी और एक आईपीएस साहब हैं। आईपीएस साहब हैं आईजी बरेली जोन जो ये बैरिकेटिंग लगाते हैं देखते हैं कि 300 भैंस के अलावा कहीं 1300 भैंस तो नहीं जा रही है। ये देखें कि 300 भैंस के लिए कितने ट्रक चाहिए और 1300 भैंस भर के कितने ट्रक जा रहे हैं। यह उन्होंने नहीं देखा। डीएम साहब ने जाने क्या देखा। रिपोर्ट कंप्लायंस हम अब उन्हीं के सबूत बता रहे हैं कि कंप्लायंस नहीं यहां अत्याचार हुआ। यहां अनर्थ हुआ है। अब बताइए दोस्तों सन्यासी शासन में इतना बड़ा अत्याचार और ये आईएएस अधिकारियों ने नहीं रोका। तो क्या इनकी इन्वॉल्वमेंट नहीं है? बताओ। वहां सरकारी स्लॉटर हाउस, सरकारी अधिकारियों का पहरा। ऐसे में अकेला बीफ कांट्रेक्टर इतना बड़ा अत्याचार कैसे कर सकता है बताओ सरकारी स्लॉटर हाउस सरकारी अधिकारी दोनों का दुरुपयोग अकेला बीफ कांट्रेक्टर कैसे कर सकता है बताइए बिना लाइसेंस लाखों भैंस कैसे कटवा सकता है अकेला बीफ कारोबारी बताइए सरकारी स्लॉटर हाउस में अकेला बीफ कारोबारी लाखों भैंस बिना लाइसेंस कैसे काट सकता है मतलब 1000 भैंस रोज बिना लाइसेंस काटे सालों साल काटे 4-5 लाख हो रही है गिनती में। आप देख लीजिएगा। मैं कोई यहां प्रूव नहीं कर रहा हूं। लेकिन बातें बता रहा हूं। कागजों के साथ सच्चाई। अब बताइए एनिमल हस्बेंडरी के डायरेक्टर साहब को एक भैंस अंदर एंटीमार्टम पोस्टमार्टम किए बिना नहीं निकल सकती। मगर 300 की जगह 1300 जा रही हैं। होश नहीं। यह साबित कर दिया। छापा लगाया और प्रदूषण बोर्ड को कमिश्नर फूड सेफ्टी को कार्यवाही लिखी। यह बड़ी लिख दी। यह बड़ी खरा लिख दी। क्या लिखा? 46 करोड़ वसूल लिया है। इललीगल अनलिमिटेड स्लॉटिंग वही है। क्या करते रहे आप लोग? हमने इनकम टैक्स अपना जो काली कमाई थी इनकी उसमें से 46 करोड़ टैक्स वसूल लिया है। 1000-1200 करोड़ की जो स्लॉटरिंग की है जो कमाई की है 46 करोड़ टैक्स वसूल लिया। आप लोग भी अपना वसूल लीजिए। इसलिए ये चिट्ठियां लिखी गई गोलमोल कानून को करने के लिए। इन्हें अपनी नौकरी का संकट दिखाई देने लग गया। तब इन्होंने ये गोलमोल किया। अब बताइए ऐसे आईएएस अधिकारियों से हमारा देश कैसे बताइए? फिर हमारी सृष्टि, हमारी सांस प्यास, हमारी यमुना नदी देख लो दिल्ली की। यह जिंदा रहेगी। बरेली की रामगंगा देखो। रामगंगा नदी में यह डिस्चार्ज किया है। सीधा-सीधा जोगी गया है। यह क्या किया होगा? यह हमारे संतों की आस्था में यह राक्षसी विघ्न है।









