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भारत की लाज बचाई, गंगा के दियारा क्षेत्र ने

निशांत सिंह
भारत की लाज बचाई, गंगा के दियारा क्षेत्र ने, जी हां.! जहां एक तरफ सारा विश्व प्रवासी पंक्षी दिवस मना रहा। वहीं हमारा देश दुनिया में सबसे पीछे जाते-जाते बच गया। नदियों के देश में जहां प्रवासी पंक्षियों के बसेरे उजड़ गए। वहीं दूसरी तरफ भागलपुर का गंगा दियारा क्षेत्र देश की शान बनकर उभरा है। यहां ना सिर्फ 70 से 75 तरह के ऐसे प्रवासी पंक्षी दिखते हैं, जिन्हें अन्र्तराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ ने विलुप्त घोषित कर रखा है। बल्कि यहां ऐसे दर्जनों पंक्षी हैं जो अपनी पीढ़ी बढ़ाने के लिए अनुकूल जगह, अनुकूल समय मानते हैं। बहरहाल नदियों के देश में जहां छोटा गरुण, काले सिर का बगुला, तितरी जैसे पंक्षियों के बसेरे सैकड़ों में और जगह-जगह थे, उन्हीं प्रवासी पंक्षियों के बसेरे आज विलुप्त जैसे खंडहर लगने लगे। दर्जनों ऐसे पंक्षी विलुप्त हो गए, सालों-साल नहीं दिखते, जो हमारे देश की शान माने जाते थे, आज न पंक्षी बचे, न उनके घर। बहरहाल, आज 11 अक्टूबर जब सारा विश्व प्रवासी पंक्षी दिवस मना रहा, ऐसे में भागलपुर में गंगा नदी का दियारा क्षेत्र भारत की लाज बनकर उभरा है। यहां दर्जनों ऐसे पंक्षी देखे गए, जो हमारे देश में सालों से नहीं दिख रहे, जो विलुप्त होने की कगार पर हैं। जिसमें ये गरुण, काले सिर का बगुला, तितरी जैसे भी शामिल हैं।
यूं तो भागलपुर के गंगा क्षेत्र में लगभग 70 से 75 तरह के पंक्षी अक्सर देखे जाते हैं। जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ ने विलुप्त बताया। मगर भागलपुर में वो सभी पंक्षी भी मिले हैं, बहुत सारे प्रवासी पंक्षी तो उनके हिसाब का माहौल बनने के कारण बड़ी संख्या में बच्चों को जन्म देते हैं। गंगा तट की शांति में यहां जैसे प्रकृति फिर से जाग उठी है। बल्कि इस किनारे, उस किनारे दोनों तरफ दियारा क्षेत्र में अब दुर्लभ पंक्षियों के बसेरे दिख रहे हैं। यहां प्रकृति पूरी तरह खुश देखी गई।

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